उत्तराखंड “हरिद्वार महायोजना-2041” शासन स्तर पर अटकी, बाहरी क्षेत्रों में बेतरतीब बसावट से जल निकासी और बुनियादी ढांचे पर संकट,,,

हरिद्वार। धार्मिक नगरी के सुनियोजित विस्तार और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से तैयार की गई ‘हरिद्वार महायोजना-2041’ शासन की अंतिम मंजूरी के इंतजार में अटकी हुई है। जनता से प्राप्त आपत्तियों और सुझावों के निस्तारण की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद योजना के लागू न होने से शहर के विकास को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस प्रशासनिक देरी के बीच शहर के सीमांत और बाहरी क्षेत्रों में तेजी से नई आवासीय कॉलोनियां विकसित हो रही हैं, जिससे आने वाले समय में सड़क, नाली और जल निकासी जैसी प्राथमिक जनसुविधाओं की व्यवस्था करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
🟢 भविष्य की जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग का निर्धारण जरूरी
महायोजना-2041 का मुख्य उद्देश्य शहर का सुव्यवस्थित विस्तार करना है। इसके तहत भविष्य की आबादी और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और हरित क्षेत्रों के लिए भूमि का उपयोग (लैंड यूज) तय किया जाना है। समय पर महायोजना लागू होने से विकास कार्यों को एक स्पष्ट दिशा मिलती है और अनियोजित बसावट पर रोक लगती है। हालांकि, शासन से स्वीकृति न मिलने के कारण वर्तमान में बाहरी इलाकों में बिना किसी स्पष्ट मास्टर प्लान के निर्माण कार्य तेजी से जारी हैं।
🟢 प्रारंभिक चरण में चूक बनी तो बढ़ेगा जलभराव का संकट
शहरी नियोजन विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बाहरी इलाकों में विकसित हो रही कॉलोनियों में शुरुआत से ही बरसाती पानी की निकासी के लिए पर्याप्त भूमि और नेटवर्क सुनिश्चित नहीं किया गया, तो भविष्य में गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न होगी। निर्माण कार्य पूरे होने के बाद निकासी के रास्ते सीमित हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में बाद में नए नाले बनाने या जल निकासी का तंत्र सुधारने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण और भारी बजट की आवश्यकता पड़ेगी, जिससे स्थानीय निवासियों को भी लंबे समय तक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
🟢 350 आपत्तियों का हो चुका है निस्तारण
महायोजना के प्रारूप को अंतिम रूप देने से पूर्व आम जनता और हितधारकों से आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए गए थे। इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 350 आपत्तियां और सुझाव प्राप्त हुए, जिनका सक्षम स्तर पर निस्तारण किया जा चुका है। निस्तारण के बाद फाइल को शासन की स्वीकृति के लिए भेजा गया था, लेकिन योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि योजना के अभाव में तेजी से बढ़ रही अनियोजित बसावट के बीच बुनियादी सुविधाओं का ढांचा कैसे संतुलित किया जाएगा।
🟢 अधिकारी का बयान: “हरिद्वार महायोजना-2041 की पत्रावली शासन स्तर पर विचाराधीन है। इसको लेकर अग्रिम कार्यवाही गतिमान है और जल्द ही इस पर निर्णय होने की उम्मीद है।”- आनंद स्वरूप, गढ़वाल मंडलायुक्त
