उत्तराखंड उत्तरकाशी में अब ट्रैकिंग कंपनियों से शुल्क वसूलेगी ग्राम सभा, नियम तोड़ने पर लगेगा ₹50 हजार का भारी जुर्माना,,,,

उत्तरकाशी। देवभूमि उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों और बुग्यालों को प्रदूषण से बचाने के लिए अब स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपना लिया है। उत्तरकाशी जिले की ग्राम सभा गंगाड़ ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपने क्षेत्र से गुजरने वाली सभी ट्रैकिंग कंपनियों के लिए सख्त नियम और भारी जुर्माने का प्रावधान लागू कर दिया है।
ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में आयोजित हुई महापंचायत (खुली बैठक) में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया है कि ग्राम पंचायत क्षेत्र से होकर गुजरने वाले प्रत्येक ट्रैकिंग दल (ग्रुप) को स्थानीय विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए ₹2,000 का अनिवार्य शुल्क जमा करना होगा।
🟢 इन प्रसिद्ध ट्रैकिंग रूटों पर लागू होंगे नए नियम
ग्राम पंचायत गंगाड़ के अधिकार क्षेत्र में आने वाले उत्तराखंड के कई विश्व प्रसिद्ध ट्रैकिंग मार्गों पर यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है:
- जोन बाम्बे – रुईसारा ट्रैक
- बाली पास ट्रैक
- काला नाग (ब्लैक पीक) ट्रैक
- धोनदार कांटी पास ट्रैक
इनमें से किसी भी मार्ग पर जाने वाले ट्रैकिंग ऑपरेटरों को ग्राम पंचायत में निर्धारित शुल्क की रसीद कटवानी होगी।
🟢 कचरा छोड़ा तो ₹50,000 का डंडा, 12 जून तक की मोहलत
ग्राम सभा ने साफ कर दिया है कि ट्रैकिंग कंपनियां पहाड़ों में गंदगी फैलाकर नहीं छोड़ सकतीं। नए नियमों के मुताबिक:
कचरा प्रबंधन अनिवार्य: ट्रैकिंग कंपनियों को अपने दल द्वारा फैलाए गए प्लास्टिक, टिन और अन्य कचरे को वापस लाना ही होगा।
भारी जुर्माना: यदि किसी कंपनी ने बुग्यालों, जंगलों या जल स्रोतों के पास कचरा छोड़ा, तो उस पर ₹50,000 तक का जुर्माना ठोका जाएगा।
डेडलाइन: सभी ट्रैकिंग कंपनियों को निर्देशित किया गया है कि वे 12 जून 2026 तक प्रति ग्रुप ₹2,000 की राशि ग्राम प्रधान के माध्यम से ग्राम पंचायत कोष में जमा करना सुनिश्चित करें।
🟢 धार्मिक स्थलों की पवित्रता और संस्कृति का रखना होगा ध्यान
बैठक में केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति के संरक्षण पर भी जोर दिया गया। प्रस्ताव के अनुसार, कोई भी कंपनी बिना अनुमति के बुग्यालों या चारागाहों में स्थायी कैंप (Tents) स्थापित नहीं कर पाएगी। साथ ही, ट्रैकर दलों को क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की पवित्रता का पूरा सम्मान करना होगा।
नियमों की अनदेखी करने वाली या बार-बार उल्लंघन करने वाली कंपनियों को भविष्य में इस क्षेत्र में ट्रैकिंग संचालित करने से पूरी तरह प्रतिबंधित (Ban) करने की संस्तुति भी की जाएगी।
🟢 ग्रामीणों की गूंज, “धरोहर बचाना हमारी प्राथमिकता”
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर साल हजारों पर्यटकों के आने से संवेदनशील हिमालयी पर्यावरण, बुग्यालों और जल स्रोतों को भारी नुकसान पहुंच रहा था। ग्राम सभा को उम्मीद है कि इस कड़े कदम से उत्तराखंड में ‘जिम्मेदार और सतत पर्यटन’ (Responsible Tourism) को बढ़ावा मिलेगा और देवभूमि की प्राकृतिक सुंदरता आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सकेगी।
