उत्तराखंड रायपुर सीट पर कांग्रेस में बढ़ी सियासी तपिश, लगातार दो हार के बाद ‘जिताऊ’ चेहरे की तलाश जारी,,,

देहरादून। उत्तराखंड में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजधानी देहरादून की रायपुर विधानसभा सीट पर राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है। कांग्रेस खेमे में टिकट की दावेदारी को लेकर संगठन के भीतर गहमगहमी का माहौल है। हालाँकि, पिछले दो चुनावों में लगातार मिली पराजय के बाद पार्टी आलाकमान के सामने इस बार एक बेहद मजबूत और ‘जिताऊ’ प्रत्याशी चुनने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
🟢 रायपुर का राजनीतिक इतिहास और समीकरण
वर्ष 2007 तक वर्तमान रायपुर क्षेत्र ‘डोईवाला’ विधानसभा का हिस्सा हुआ करता था। 2007 के चुनाव में यहाँ से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जीत दर्ज की थी। परिसीमन के बाद जब रायपुर सीट स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में आई, तब 2012 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर उमेश शर्मा काऊ ने बाजी मारी थी।
हालाँकि, उमेश शर्मा काऊ के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद से कांग्रेस इस सीट पर अपना वर्चस्व वापस हासिल नहीं कर पाई है। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए काऊ ने 2017 और 2022 में भी जीत का परचम लहराया। दिलचस्प बात यह है कि रायपुर सीट पर भाजपा के वरिष्ठ नेता त्रिवेंद्र सिंह रावत और कांग्रेस के दिग्गज नेता हीरा सिंह बिष्ट दोनों ही अतीत में हार का स्वाद चख चुके हैं।
🟢 2027 के लिए दावेदारों ने सजाई फील्डिंग
2027 के चुनावी दंगल को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस से दावेदारों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। वर्तमान में क्षेत्र में सक्रिय नेताओं में:
- सूरज नेगी
- विनीत प्रसाद भट्ट
- प्रवीण त्यागी
- हेमा पुरोहित
- महेंद्र सिंह नेगी
सहित कई अन्य प्रमुख नाम चर्चाओं के केंद्र में हैं। इन तमाम दावेदारों ने ज़मीन पर अपनी पकड़ मजबूत करने और शीर्ष नेतृत्व का ध्यान खींचने के लिए चुनावी फील्डिंग सजानी शुरू कर दी है।
🟢 सत्ता में वापसी के लिए केवल ‘जीतने की क्षमता’ ही पैमाना
2027 में राज्य की सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि किसी भी गुटबाज़ी से ऊपर उठकर टिकट केवल उसी प्रत्याशी को दिया जाएगा जिसमें चुनाव जीतने की वास्तविक क्षमता होगी।
फिलहाल दावेदारों के बीच अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने की होड़ मची है, लेकिन अंतिम मुहर कांग्रेस हाईकमान की ही लगेगी। रायपुर की जनता और पार्टी कार्यकर्ता अब इस बात के इंतज़ार में हैं कि आलाकमान इस बार किस चेहरे पर दांव लगाता है।
