“देश – दुनिया” प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दिया बड़ा संदेश, ” देशों का समूह नहीं, बल्कि समाधानों का इकोसिस्टम है- ब्रिक्स “
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अपने समापन भाषण में ब्रिक्स की प्रासंगिकता और उसके व्यापक दृष्टिकोण को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स केवल कुछ देशों का संगठन मात्र नहीं है, बल्कि यह वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए व्यावहारिक और साझा समाधानों का एक सशक्त इकोसिस्टम है।
🟢 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा रखे गए प्रमुख बिंदु
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- समाधानों का इकोसिस्टम: पिछले दो दिनों की गहन चर्चाओं के आधार पर यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि ब्रिक्स वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए व्यावहारिक और साझा समाधान प्रस्तुत करता है।
- सहयोग की समावेशी नीति: प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से जोर दिया कि यह समूह किसी भी देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि आपसी सहमति, संप्रभुता और आपसी सम्मान के सिद्धांतों पर आगे बढ़ता है।
- नई दिल्ली घोषणापत्र को मंजूरी: शिखर सम्मेलन में सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को अपना लिया गया। इस दस्तावेज में प्रमुख रूप से वैश्विक संस्थाओं में व्यापक सुधार और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
- ग्लोबल साउथ की भागीदारी: उद्घाटन सत्र के दौरान भी पीएम मोदी ने वैश्विक शासन संरचनाओं में सुधार और ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की मजबूत और अर्थपूर्ण भागीदारी के लिए अपने अहम सुझाव रखे थे।
इस सम्मेलन के सफल समापन से वैश्विक मंच पर विकासशील देशों की आवाज और अधिक मजबूत हुई है, जो बहुपक्षीय सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
