देहरादून के दून मेडिकल कालेज में मुस्लिम डॉक्टर ने हिंदू डॉक्टर की पूजा-पाठ पर की रोक-टोक, हिंदू संगठनों ने किया विरोध प्रदर्शन,,,,
देहरादून: राजकीय दून मेडिकल कालेज अस्पताल में पैथौलाजी की विभागाध्यक्ष डा. गजाला रिजवी पर सहकर्मी महिला कर्मचारी के पूजा-पाठ में हस्तक्षेप के आरोपों ने शनिवार को विवाद खड़ा कर दिया।
आरोप है कि अस्पताल परिसर स्थित मंदिर में पूजा करने जाने वाली महिला कर्मचारी को डा. गजाला ने कई बार रोका, कलावा पहनने पर आपत्ति जताई गई और माथे पर टीका लगाने पर भी टिप्पणी की।
आरोप सामने आने के बाद हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया और डा. गजाला के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की मांग की।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार संबंधित महिला कर्मचारी नियमित रूप से अस्पताल परिसर में बने मंदिर में पूजा करती है।
आरोप है कि इसी दौरान डा. गजाला रिजवी ने कई बार उसे टोका और धार्मिक प्रतीकों को लेकर आपत्ति जताई। मामला धीरे-धीरे कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बना और शनिवार को सार्वजनिक विरोध तक पहुंच गया।
इस घटनाक्रम को लेकर हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ता अस्पताल पहुंचे और मुख्य गेट पर प्रदर्शन किया।
संगठन के अध्यक्ष ललित शर्मा ने कहा कि सरकारी संस्थान में किसी भी कर्मचारी को अपनी आस्था के अनुसार पूजा-पाठ करने से रोकना गंभीर विषय है। किसी को भी दूसरे धर्म के तौर-तरीकों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि पांच दिन के भीतर संबंधित जांच या प्रशासनिक कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो संगठन आंदोलन को और तेज करेगा। प्रदर्शन में महानगर अध्यक्ष सागर राजपूत, संध्या राजपूत, राधे, रंजीत, प्रथम और शुभम सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
प्रशासन की चुप्पी से सवाल
इस मामले में मेडिकल कालेज प्रशासन की ओर से देर शाम तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। कालेज प्राचार्य डा. गीता जैन से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने काल नहीं उठाया। उन्होंने मैसेज का जवाब भी नहीं दिया।
इससे कर्मचारियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि संवेदनशील आरोपों पर प्रशासन तत्काल स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहा। डा. गजाला रिजवी को भी फोन व मैसेज कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा उभरा
अस्पताल जैसे सार्वजनिक संस्थान में यह विवाद अब धार्मिक स्वतंत्रता और पारस्परिक सम्मान की बहस में बदलता दिख रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि संस्थान में सभी को अपनी व्यक्तिगत आस्था के साथ काम करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, जब तक कार्य प्रभावित न हो।
मेडिकल कालेज में महिला कर्मचारी कोई गैरकानूनी कार्य नहीं कर रही है जो उसे रोका जाए। यह देवभूमि है और यहां कण-कण में भगवान हैं। यदि इसे रोकेंगे तो इससे संस्कृति स्वत: ही नष्ट हो जाएगी, जिसे विश्व हिंदू परिषद कभी होने नहीं देगा।
आलोक सिन्हा, विभाग मंत्री, विश्व हिंदू परिषद
यह मामला काफी लंबे समय से चल रहा है। जहां महिला कर्मचारी को एक महिला डाक्टर पूजा पाठ करने से रोकती है। अन्य कर्मचारी भी डाक्टर के इस व्यवहार से नाराज हैं। बजरंग दल सोमवार को डाक्टर के विरुद्ध कार्रवाई के लिए कालेज प्रशासन से वार्ता करेगा। विकास वर्मा, प्रांत मिलन प्रमुख, बजरंग दल

