उत्तराखंड चारधाम यात्रा की रफ्तार धीमी होने के बाद भी थम नहीं रहा ट्रैफिक, बदरीनाथ हाईवे पर लगा लंबा जाम घंटों रेंग- रेंग कर चले वाहन,,,,
श्रीनगर गढ़वाल। चारधाम यात्रा की गति में पिछले दिनों की तुलना में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों का दबाव और जाम की समस्या अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। रविवार को ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था दिनभर रह-रहकर प्रभावित होती रही। श्रीनगर गढ़वाल से लेकर सिद्धपीठ धारी देवी और आगे गोवा बीच तक के क्षेत्र में वाहनों की लंबी कतारें लगी नजर आईं, जिससे तीर्थयात्रियों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
🔴 सुबह से ही उमड़ा यात्री वाहनों का रेला, कई किलोमीटर तक लगी कतारें
रविवार होने के कारण हाईवे पर अचानक यात्री वाहनों की संख्या में भारी इजाफा देखा गया। श्रीनगर गढ़वाल के मुख्य बाजार से लेकर घसिया महादेव, श्रीकोट, फरासू-चमधार और कलियासौड़ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुबह करीब 9 बजे से ही वाहनों के पहिये थमने शुरू हो गए। दोपहर 1 बजे तक हाईवे पर बार-बार जाम की स्थिति बनती और बिगड़ती रही। इस दौरान बड़ी ट्रैवलर बसों, टैक्सियों और निजी कारों के साथ-साथ भारी संख्या में दोपहिया वाहन भी जाम के झाम में फंसे रहे।
🔴 भीषण गर्मी में यात्री परेशान, ट्रैफिक सामान्य करने में छूटे पुलिस के पसीने
हाईवे पर लगे इस लंबे जाम के कारण तीर्थयात्रियों को भीषण गर्मी और उमस के बीच घंटों तक वाहनों में बैठकर इंतजार करना पड़ा। यातायात व्यवस्था को दोबारा सुचारु करने और वाहनों को जाम से निकालने के लिए पुलिसकर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। विभिन्न चौकियों और मुख्य मोड़ों पर तैनात पुलिसकर्मी चिलचिलाती धूप में घंटों पसीना बहाते नजर आए, जिसके बाद ही यातायात को धीरे-धीरे सामान्य किया जा सका।
🔴 स्थानीय आवाजाही प्रभावित, प्रशासन के लिए वाहनों का बढ़ता दबाव बड़ी चुनौती
इस बार-बार लगने वाले जाम का असर न केवल चारधाम के तीर्थयात्रियों पर पड़ा, बल्कि स्थानीय जनता भी बुरी तरह प्रभावित रही। दैनिक कार्यों और आपातकालीन सेवाओं के लिए निकलने वाले स्थानीय लोगों को भी घंटों सड़क पर फंसे रहना पड़ा। यात्रा सीजन की शुरुआत से ही जिला व पुलिस प्रशासन लगातार यातायात प्रबंधन के दावे कर रहा है, लेकिन श्रीनगर से रुद्रप्रयाग की ओर जाने वाले इस संकरे मार्ग पर वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या और संकरे पैच अब भी प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

