उत्तराखंड के ऋषिकेश में गूंजी वैश्विक धुनें, इंटरनेशनल मृदंग फाउंडेशन के समारोह में भारतीय-अंतरराष्ट्रीय कलाकारों का शास्त्रीय फ्यूज़न, संगीत प्रेमियों को किया मंत्रमुग्ध,,,,
ऋषिकेश। योग और आध्यात्म की नगरी ऋषिकेश में इंटरनेशनल मृदंग फाउंडेशन द्वारा आयोजित विशेष संगीत समारोह कला और संस्कृति का एक अनूठा केंद्र बन गया। इस समारोह में देश-विदेश के जाने-माने कलाकारों ने मंच साझा करते हुए एक अद्भुत शास्त्रीय फ्यूज़न (Classical Fusion) प्रस्तुति दी। इस अनोखे संगीत संगम में भारतीय शास्त्रीय संगीत की सदियों पुरानी गहराई और वैश्विक ध्वनियों का एक अत्यंत दुर्लभ व उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला, जिसने वहाँ मौजूद संगीत प्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया।
🟢 68 देशों में भारतीय संगीत का परचम लहरा चुके हैं कलाकार
इस आयोजन की गरिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार्यक्रम में शामिल मुख्य कलाकार—तबला उस्ताद (Maestro) निलिमेश चक्रवर्ती और संतूर उस्ताद सुद्धाशील चटर्जी—इससे पहले दुनिया के 68 देशों में भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रतिनिधित्व कर वैश्विक पटल पर देश का नाम रोशन कर चुके हैं।
प्रस्तुति के दौरान जहाँ निलिमेश चक्रवर्ती के तबले की जटिल लयकारी ने पूरे कार्यक्रम को एक मजबूत आधार दिया, वहीं सुद्धाशील चटर्जी के संतूर से निकली मधुर और दिव्य धुनों ने पूरे वातावरण को शांतिमय रस से सराबोर कर दिया।
🟢 मृदंगम, डिग्गिराडू और गिटार के संगम से बना ‘विश्व संगीत’
इस समारोह की सबसे बड़ी विशेषता विभिन्न संस्कृतियों के वाद्यों का एक मंच पर आना रहा। मृदंगम वादक सत्या ने दक्षिण भारतीय शास्त्रीय परंपरा की समृद्ध और शक्तिशाली लय को इस फ्यूज़न में शामिल किया। वहीं, पारंपरिक ऑस्ट्रेलियाई वाद्य यंत्र ‘डिग्गिराडू’ (Didgeridoo) पर वादक दुष्यंत की गहरी और कंपनयुक्त ध्वनि ने इस प्रस्तुति को वैश्विक स्तर तक पहुँचाया। इसके साथ ही रूस से आए गिटार वादक के वेस्टर्न कॉर्ड्स ने इस जुगलबंदी में विश्व संगीत का ऐसा रंग घोला कि दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए।
🟢 “संगीत की जन्म लेती है नई भाषा” — कलाकारों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने इस अनूठे फ्यूज़न को लेकर अपने विचार और अनुभव भी साझा किए:
- तबला maestro निलिमेश चक्रवर्ती: “जब अलग-अलग संस्कृतियों के कलाकार एक साथ आते हैं, तो संगीत की एक नई भाषा जन्म लेती है।”
- संतूर maestro सुद्धाशील चटर्जी: “ऋषिकेश जैसे आध्यात्मिक स्थान पर यह फ्यूज़न और भी खास हो जाता है। यहां की ऊर्जा संगीत को और गहरा बना देती है।”
- डिग्गिराडू वादक दुष्यंत: “भारतीय राग और डिग्गिराडू की ध्वनि का मेल बहुत स्वाभाविक है। यह प्रस्तुति संस्कृतियों को आपस में जोड़ने का एक अनूठा प्रयास है।”
- मृदंगम वादक सत्या: “उत्तर और दक्षिण भारतीय संगीत के साथ अंतरराष्ट्रीय ध्वनियों का यह संगम संगीत की दुनिया में एक नई दिशा की शुरुआत है।”
🟢 वैश्विक मंच पर भारतीय संगीत को मिलेगी नई पहचान

इंटरनेशनल मृदंग फाउंडेशन का यह सफल आयोजन भारतीय शास्त्रीय फ्यूज़न संगीत के क्षेत्र में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। कार्यक्रम में मौजूद संगीत प्रेमियों और विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के अभिनव प्रयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर एक नई और बेहद मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

