उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा झटका, राज्य आंदोलनकारियों के वंशजों को नियुक्ति पत्र जारी करने पर हाई कोर्ट ने रखी रोक बरकरार,,,

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों में निकाली गई भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। जस्टिस पंकज पुरोहित की एकल पीठ ने 751 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया में राज्य आंदोलनकारियों के वंशजों को फिलहाल नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने यूकेएसएसएससी और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे 6 सप्ताह के भीतर इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करें।
🟢 भर्ती प्रक्रिया के बीच में नियम बदलने पर आपत्ति
यह मामला हरिद्वार निवासी सक्षम चौहान द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार द्वारा जारी 01 जुलाई 2026 के शासनादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
- विज्ञापन एवं आवेदन तिथि: यूकेएसएसएससी ने 04 नवंबर 2024 को 751 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था, जिसकी अंतिम तिथि 01 नवंबर 2024 (विज्ञापन प्रक्रिया के तहत) तय की गई थी।
- शासनादेश पर विवाद: राज्य सरकार ने 01 जुलाई 2026 को शासनादेश जारी कर उन अभ्यर्थियों को भी दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) में शामिल होने की अनुमति दे दी, जिन्होंने आवेदन के समय राज्य आंदोलनकारी प्रमाणपत्र संलग्न नहीं किया था।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला: याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के तेज प्रकाश पाठक एवं अन्य बनाम राजस्थान हाईकोर्ट मामले का संदर्भ देते हुए तर्क दिया कि “खेल शुरू होने के बाद खेल के नियम नहीं बदले जा सकते”। यानी भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के उपरांत निर्धारित पात्रता शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
🟢 हाईकोर्ट ने खारिज किया आयोग का स्पष्टीकरण
अदालत ने 15 और 22 जुलाई 2026 को इस मामले पर सुनवाई की:
अदालत की सख्त टिप्पणी: आयोग ने 22 जुलाई की सुनवाई में तर्क दिया था कि आंदोलनकारियों के आश्रितों को उसी तरह छूट दी जा सकती है जैसे अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के अभ्यर्थियों को दी जाती है। हालांकि, पीठ ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि SC वर्ग के अभ्यर्थियों को भी अपनी श्रेणी का लाभ लेने के लिए सक्षम प्राधिकारी से प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।
सरकार की ओर से तय समय में जवाबी हलफनामा न दाखिल किए जाने पर हाईकोर्ट ने आयोग और सरकार के रुख पर कड़ा रुख अपनाया है।
🟢 अगली सुनवाई 16 सितंबर को
हाईकोर्ट ने 15 जुलाई 2026 को नियुक्ति पत्रों के वितरण पर जो अंतरिम रोक लगाई थी, उसे अगली सुनवाई तक बढ़ा दिया है। अब इस चर्चित मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को होगी, तब तक निजी प्रतिवादियों और आंदोलनकारियों के वंशजों को नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए जा सकेंगे।
