उत्तराखंड ‘हिलांस’ बना पहाड़ी महिलाओं की आजीविका का सशक्त जरिया, पारंपरिक उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान और आर्थिक मजबूती,,,

नैनीताल: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में तैयार होने वाले पारंपरिक और स्थानीय उत्पाद अब गांवों और आसपास के बाजारों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि हिलांस आउटलेट के माध्यम से पहाड़ के स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलने के साथ ही ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं. इससे महिलाएं अपने घर और गांव में रहकर अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
हिलांस के जरिए पहाड़ी अनाज, दालें, मसाले, जैविक उत्पाद, स्थानीय खाद्य सामग्री और स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले कई उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है. खास बात यह है कि इन उत्पादों की मांग उत्तराखंड और देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ अब विदेशों तक भी पहुंच रही है. इससे पहाड़ की पारंपरिक खेती, खान-पान और स्थानीय हुनर को नई पहचान मिल रही है।
🟢 मंडुवा, झिंगुरा से लेकर अचार-जैम तक बन रहे उत्पाद
नैनीताल के हनुमानगढ़ी स्थित हिलांस आउटलेट की संचालिका निर्मला जोशी बताती हैं कि उनके आउटलेट से कई स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं जुड़ी हुई हैं. महिलाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पहाड़ी अनाज और खाद्य सामग्री से अलग-अलग उत्पाद तैयार कर रही हैं. उन्होंने बताया कि महिलाएं मंडुवे का आटा, रागी का आटा, लाल चावल, झिंगुरा चावल, मिक्स दाल, शहद, मंडुवे की नमकीन, अचार, जैम और ऐपन समेत 20 से अधिक तरह के उत्पाद तैयार कर रही हैं, इन उत्पादों को हिलांस आउटलेट के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है. निर्मला जोशी बताती हैं कि, उन्हें भीमताल ब्लॉक के माध्यम से यह आउटलेट मिला है और यहां ग्राहकों का रिस्पांस अच्छा मिल रहा है. अलग-अलग स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं उनके साथ जुड़ी हैं, महिलाएं उत्पाद तैयार करने से लेकर उन्हें बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया में भागीदारी कर रही हैं।
🟢 गांव में रहकर महिलाओं को मिल रहा रोजगार
हिलांस जैसी पहल का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा है. पहाड़ी क्षेत्रों में कई महिलाएं खेती और पारंपरिक खाद्य उत्पाद बनाने का काम करती हैं, लेकिन बाजार तक सीधी पहुंच नहीं होने के कारण उन्हें अपने उत्पादों की उचित कीमत नहीं मिल पाती थी. अब स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तैयार उत्पादों को संगठित बाजार मिल रहा है. इससे महिलाओं के स्थानीय हुनर को व्यावसायिक पहचान मिल रही है. साथ ही उन्हें अपने गांव और घर से जुड़े रहकर आय का जरिया भी मिल रहा है. मंडुवा, झिंगुरा, लाल चावल जैसे पारंपरिक अनाजों के साथ अचार, जैम, शहद और ऐपन जैसे उत्पादों की बिक्री से स्थानीय उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है।

🟢 प्रदेश सरकार की योजनाओं से महिलाओं को मिल रहा आर्थिक सहारा
नैनीताल के एडीएम विवेक राय बताते हैं कि, महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं. ग्राम विकास और शहरी विकास विभाग के माध्यम से महिलाओं को समूहों से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के तहत महिलाओं को शुरुआत में कुछ फंड उपलब्ध कराया जाता है. इसका उपयोग महिलाएं अपने काम को शुरू करने या आगे बढ़ाने में कर सकती हैं. इसके अलावा सरकारी सहायता के तहत ब्याज पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है, कुछ योजनाओं में ब्याज रहित ऋण का प्रावधान भी है. एडीएम विवेक राय ने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना, उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर करना और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
🟢 पहाड़ के उत्पादों को मिल रही है देश विदेश मे नई पहचान
हिलांस आउटलेट के जरिए पहाड़ की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को केवल स्थानीय बाजार ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार भी मिल रहा है. इससे पारंपरिक पहाड़ी खाद्य पदार्थों और स्थानीय उत्पादों की पहचान बढ़ रही है. एक ओर जहां मंडुवा, झिंगुरा और लाल चावल जैसे पारंपरिक अनाज लोगों की थाली तक पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इनसे जुड़े महिला समूहों को अपनी मेहनत का बाजार मिल रहा है। यही वजह है कि हिलांस आउटलेट महिलाओं के लिए सिर्फ एक बिक्री का केंद्र नहीं, बल्कि स्वरोजगार, आत्मनिर्भरता और पहाड़ी उत्पादों को नई पहचान देने का माध्यम भी बनता जा रहा है।

