उत्तराखंड लंबे इंतजार के बाद में मानसून ने दी दस्तक, मौसम विभाग ने जारी किया भारी बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’, पर्वतीय क्षेत्रों में सतर्कता बरतने के निर्देश,,,

देहरादून। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने उत्तराखंड में आधिकारिक रूप से दस्तक दे दी है। मानसून के प्रवेश के साथ ही पूरे प्रदेश में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। पिछले कई दिनों से भीषण उमस और गर्मी से परेशान लोगों को इससे बड़ी राहत मिली है। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून ने मानसून के आगमन के साथ ही अगले दो दिनों के लिए राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट (Orange Alert) जारी किया है। इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में तेज बारिश, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं को लेकर भी विशेष चेतावनी जारी की गई है।
मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल के अनुसार, इस बार मानसून अपने तय समय से थोड़ा विलंब से पहुंचा है। हालांकि शुरुआती दिनों में कई जिलों में तेज वर्षा होने की संभावना है, लेकिन मौसम विभाग का अनुमान है कि पूरे सीजन में इस वर्ष उत्तराखंड में सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा सकती है।
🔴 1 और 2 जुलाई को लेकर भारी अलर्ट
मौसम विभाग ने आगामी दो दिनों के लिए प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक बारिश का अनुमान लगाया है:
- 1 जुलाई का पूर्वानुमान: देहरादून और बागेश्वर जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल, चंपावत, ऊधम सिंह नगर और पिथौरागढ़ में भारी बारिश की प्रबल संभावना है। राज्य के सभी पर्वतीय जिलों में तेज गर्जना, बिजली चमकने और झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
- 2 जुलाई का खतरा: इस दिन मौसम का मिजाज अधिक आक्रामक रहने की आशंका है। देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल और बागेश्वर में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट रहेगा। वहीं हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में अचानक जलस्तर बढ़ने और बिजली गिरने का खतरा अधिक रहेगा।
विभाग के अनुसार, 3 और 4 जुलाई को भी प्रदेशभर में बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी, जिसके लिए अधिकांश जिलों में येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा।
🔴 जून में सूखे जैसे हालात, सामान्य से काफी कम हुई बारिश
मौसम विज्ञान केंद्र के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून के महीने में उत्तराखंड में बेहद कम वर्षा दर्ज की गई। जून में केवल 83 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 132 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी। इस कमी के कारण ही मैदानी और पहाड़ी इलाकों में तापमान और उमस में भारी वृद्धि देखी जा रही थी, जिस पर अब मानसून ने विराम लगाया है।
🔴 प्रशासन और आम जनता के लिए महत्वपूर्ण एडवायजरी (Advisory)
मौसम की संवेदनशीलता और भूस्खलन के खतरों को देखते हुए मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अत्यंत सतर्क रहने की अपील की है:
- नदी-नालों से दूरी: नदी-नालों और बरसाती गदेरों के किनारे जाने से पूरी तरह बचें।
- यात्रा में सावधानी: भूस्खलन (Landslide) संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा करने से परहेज करें। खराब मौसम और विजिबिलिटी कम होने के दौरान पहाड़ी मार्गों पर विशेष सावधानी बरतें।
- आकाशीय बिजली से बचाव: बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे, खंभों के पास या खुले स्थानों में खड़े न रहें।
- अपडेट्स पर नजर: स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन और मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट्स पर लगातार नजर बनाए रखें।
