उत्तराखंड सर्वपितृ अमावस्या, धर्मनगरी हरिद्वार और देवप्रयाग में उमड़ा आस्था का सैलाब, घाटों पर हुआ पिंडदान, हाईवे पर लगा भीषण जाम,,,

हरिद्वार। सर्वपितृ अमावस्या के पावन पर्व पर शनिवार को धर्मनगरी हरिद्वार और पवित्र संगम स्थल देवप्रयाग में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और गंगा स्नान के लिए सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही हरकी पैड़ी समेत तमाम प्रमुख गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भारी भीड़ के चलते दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर दिनभर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे स्थानीय निवासियों और बाहर से आए तीर्थयात्रियों को भीषण जाम से जूझना पड़ा।
🟢 हरकी पैड़ी पर सुबह से आस्था की डुबकी, दिनभर चले तर्पण अनुष्ठान

पितृ पक्ष के अंतिम दिन अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति की कामना को लेकर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे। हरकी पैड़ी, सुभाष घाट, मालवीय द्वीप और वीआईपी घाट सहित तमाम तटों पर सुबह से ही तिल, जौ और गंगाजल के साथ तर्पण की विधियां शुरू हो गईं। तीर्थ पुरोहितों के माध्यम से श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पिंडदान और श्राद्ध कर्म संपन्न कर पूर्वजों को विदाई दी। धर्मनगरी के बाजारों और घाटों पर दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों की रौनक बनी रही।
🟢 दिल्ली-देहरादून हाईवे पर रेंगते रहे वाहन, यातायात व्यवस्था चरमराई
वाहनों के अत्यधिक दबाव के चलते दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। शहर के प्रवेश द्वारों से लेकर हाईवे के विभिन्न हिस्सों पर कई किलोमीटर लंबी गाड़ियों की कतारें देखने को मिलीं। घंटों लगे जाम के कारण हरिद्वार पहुंच रहे श्रद्धालुओं के साथ-साथ आवश्यक कार्यों से निकले स्थानीय नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पुलिस और यातायात कर्मियों को जाम खुलवाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी।
🟢 देवप्रयाग संगम पर अलकनंदा-भागीरथी के तट पर पिंडदान
उधर, टिहरी जिले के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल देवप्रयाग में भी सर्वपितृ अमावस्या पर भारी भीड़ देखने को मिली। पवित्र भागीरथी और अलकनंदा के पावन संगम स्थल पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। संगम तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने पितरों के निमित्त पिंडदान, पंचबलि कर्म और तर्पण किया। पूजा-अर्चना के उपरांत सूर्य देव को अर्घ्य देकर कुल-कुटुंब की सुख-समृद्धि एवं शांति की प्रार्थना की गई। दोनों ही प्रमुख तीर्थों पर दिनभर चले कर्मकांडों के साथ पितृ पक्ष का समापन हुआ।

