उत्तराखंड मसूरी की ‘कैरिंग कैपेसिटी’ पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव को 9 माह में नीति बनाने के निर्देश, तपोवन घाटों पर सुरक्षा बढ़ाने का भी आदेश,,,

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मसूरी में तेजी से बढ़ती जनसंख्या, पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़ और अंधाधुंध बुनियादी ढांचा विकास पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने ‘सिटिजन फॉर ग्रीन दून’ तथा सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के मुख्य सचिव को मसूरी की भार वहन क्षमता (कैरिंग कैपेसिटी) के अनुरूप व्यापक विकास रणनीति और ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
🟢 30 लाख पहुंचा पर्यटकों का आंकड़ा, सीमित संसाधनों पर भारी दबाव
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि साल 2000 में जहाँ मसूरी आने वाले पर्यटकों की संख्या लगभग 8.5 लाख थी, वहीं वर्ष 2019 तक यह आंकड़ा बढ़कर 30 लाख के पार पहुंच गया। इसके विपरीत शहर में पार्किंग की आधिकारिक क्षमता बेहद सीमित है। राजपुर रोड, किमाड़ी मार्ग, विभिन्न नई सड़क परियोजनाओं और प्रस्तावित देहरादून-मसूरी रोपवे के चलते बड़े पैमाने पर पेड़ों का कटान हो रहा है। इससे पेयजल, स्वच्छता, यातायात और समूचे पारिस्थितिक संतुलन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
🟢 मुख्य सचिव को 9 माह का समय, एनजीटी की रिपोर्ट भी होगी शामिल
खंडपीठ ने मुख्य सचिव को इस पूरे मामले में ठोस नीति तैयार करने के लिए 9 महीने की समयसीमा दी है। अदालत ने कहा कि इस अवधि में याचिकाकर्ता अपने सुझाव, डेटा और आपत्तियां सीधे मुख्य सचिव के समक्ष रख सकते हैं। साथ ही, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के पूर्व निर्देशों के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट और उसके क्रियान्वयन को भी इस नई विकास योजना में अनिवार्य रूप से समाहित किया जाएगा।
🟢 गंगा के तपोवन घाटों पर जनसुरक्षा को लेकर निर्देश: बैरिकेडिंग और चेतावनी जरूरी
एक अन्य मामले में, हाईकोर्ट ने तपोवन (टिहरी) स्थित विभिन्न स्नान घाटों—साईं घाट, हनुमान घाट, नीम बीच, गौ घाट, पूर्णानंद घाट और स्वामीनारायण घाट आदि—पर श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की याचिका पर भी सुनवाई की।
🟢 डीएम टिहरी 8 सप्ताह में करेंगे निस्तारण
हरिद्वार निवासी राज तेहरान की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे सुरक्षा खामियों का विस्तृत प्रत्यावेदन 10 दिनों के भीतर जिलाधिकारी टिहरी को सौंपें। वहीं, जिलाधिकारी को इस प्रत्यावेदन पर विधि अनुसार विचार कर 8 सप्ताह के भीतर उचित आदेश पारित कर मामले का निस्तारण करने का निर्देश दिया गया है।
🟢 ‘सुरक्षा के चाहे जितने भी इंतजाम हों, उसे और बेहतर करने की जरूरत’
याचिका में कहा गया था कि गंगा की गहराई का सही अंदाजा न होने के कारण अक्सर डूबने के हादसे होते हैं। सरकार की ओर से दलील दी गई कि मौके पर जल पुलिस, एसडीआरएफ और 40वीं वाहिनी पीएसी तैनात रहती है तथा लाउडस्पीकर से सचेत किया जाता है। इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह जनसुरक्षा का गंभीर मामला है; सुरक्षा इंतजामों को निरंतर बेहतर करने की जरूरत है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गंगा के घटते-बढ़ते जलस्तर को देखते हुए समय-समय पर स्पष्ट बैरिकेडिंग लगाई जाए ताकि लोगों को पता रहे कि नदी में कितनी दूर तक जाना सुरक्षित है और खतरे वाले क्षेत्रों में स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।
