उत्तराखंड एम्स ऋषिकेश में नर्सिंग कर्मियों की हड़ताल से चरमराईं सेवाएं, इमरजेंसी में भर्ती न होने से तड़पते रहे मरीज,,,

ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में स्वास्थ्य सेवाएं उस समय पूरी तरह ठप हो गईं, जब नर्सिंग अधिकारियों ने अपनी मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। इसका सीधा और गंभीर असर अस्पताल की इमरजेंसी, ओपीडी और ट्रॉमा सेंटर पर पड़ा। दूर-दराज के पहाड़ी जनपदों और पड़ोसी राज्यों से रेफर होकर आए गंभीर मरीजों को इमरजेंसी विभाग के चिकित्सकों ने भर्ती करने से साफ मना कर दिया। तीमारदार अपने परिजनों को स्ट्रेचर, एंबुलेंस या जमीन पर लिटाकर इलाज के इंतजार में बेबस नजर आए। स्थिति बिगड़ती देख कई तीमारदार अपने मरीजों को देहरादून के अन्य अस्पतालों या जौलीग्रांट की ओर ले जाने को विवश हुए। अस्पताल परिसर में रोजाना लगभग 3,000 से 3,500 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, लेकिन हड़ताल के चलते वहां सन्नाटा पसर गया और व्यवस्थाएं पटरी से उतर गईं।
एम्स में पदोन्नति का विवाद गहराया, दूसरा गुट भी उतरा कार्य बहिष्कार पर

ऋषिकेश: एम्स ऋषिकेश में चल रहा आंतरिक पदोन्नति विवाद अब और उग्र रूप ले चुका है। बीते 10 अक्टूबर को संस्थान प्रशासन द्वारा विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक के बाद 53 वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारियों को सहायक नर्सिंग अधीक्षक के पद पर पदोन्नत करने का आदेश जारी किया गया था। इसके विरोध में एम्स एससी-एसटी कर्मचारी कल्याण समिति ने मोर्चा खोल दिया है। समिति का आरोप है कि इस पदोन्नति सूची में आरक्षण रोस्टर का सही तरीके से पालन नहीं किया गया है। 11 अक्टूबर से चल रहे धरने के बाद मंगलवार से इस गुट ने भी पूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया, जिसके चलते अस्पताल में नर्सिंग व्यवस्था दोहरे संकट में फंस गई है।
