उत्तराखंड आस्था का शिखर, 54 की उम्र, साइकिल का सफर, 1,500 KM तय कर लगातार 14वीं बार बाबा बर्फानी के दर पहुंचे बाबू गिरि,,,

श्रीनगर: कहते हैं कि जब मन में अटूट विश्वास और महादेव की भक्ति का संबल हो, तो न ढलती उम्र आड़े आती है और न ही सैकड़ों किलोमीटर की दूरी। इस कहावत को पूरी तरह चरितार्थ कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के जाला गांव के रहने वाले 54 वर्षीय बाबू गिरि ने। बाबू गिरि पिछले 13 वर्षों से लगातार साइकिल चलाकर 1,500 किलोमीटर से अधिक की बेहद कठिन यात्रा तय कर अमरनाथ की पवित्र गुफा तक पहुंच रहे हैं। इस वर्ष भी अपने फौलादी इरादों के दम पर उन्होंने अपनी 14वीं वार्षिक यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
“उत्तर प्रदेश के औरैया से शुरू हुई भक्ति की यह अनूठी डगर; अमरनाथ दर्शन के बाद अब केदारनाथ-बद्रीनाथ के लिए थामी साइकिल की कमान”
शारीरिक रूप से भले ही बाबू गिरि कमजोर दिखते हों और चेहरे पर उम्र का पड़ाव साफ झलकता हो, लेकिन उनके हौसले किसी चट्टान से कम नहीं हैं। बाबा बर्फानी के दर्शन के बाद अपनी खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने बताया,
“हिमालय की गोद में स्थित इस पवित्र गुफा की यह मेरी लगातार 14वीं यात्रा है। बाबा बर्फानी के प्रति मेरी अटूट श्रद्धा है और पिछले 13 सालों से मैं इसी तरह साइकिल से आकर अपनी इस परंपरा को निभा रहा हूँ।”
🟢 21 जून को गृह जनपद से भरी हुंकार, 24 दिनों में पहुंचे कश्मीर
बाबू गिरि ने अपनी इस वर्ष की यात्रा की शुरुआत 21 जून को अपने गृहनगर औरैया से की थी। देश के विभिन्न राज्यों के दुर्गम रास्तों और मौसम की चुनौतियों को पार करते हुए, लगातार 24 दिनों तक पैडल मारकर वे कश्मीर घाटी पहुंचे।
हजारों किलोमीटर के इस थका देने वाले सफर के अनुभवों को साझा करते हुए बाबू गिरि बताते हैं कि उन्हें कभी किसी बड़ी मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ा। वे कहते हैं:
“सब भगवान भोलेनाथ की कृपा है। रास्ते में लोग खुद आगे बढ़कर भोजन और ठहरने की व्यवस्था कर देते हैं। मैं कभी भंडारों में रुक जाता हूँ, तो कभी यात्रा के आधार शिविरों में श्रद्धालुओं के साथ वक्त बिताता हूँ। कई बार कोई दयालु होटल या ढाबे वाला रात गुजारने के लिए जगह दे देता है। सच कहूं तो भगवान ने हमेशा मेरा ख्याल रखा है। मैं बाबा से अपने लिए कुछ नहीं मांगता, बस यही प्रार्थना करता हूँ कि वे सबकी मनोकामनाएं पूरी करें।”
🟢 बदली कश्मीर की तस्वीर- बुनियादी सुविधाओं में आया बड़ा सुधार
पिछले एक दशक से भी अधिक समय से लगातार घाटी आ रहे बाबू गिरि ने समय के साथ यहाँ हुए बदलावों को भी करीब से महसूस किया है। उनका कहना है कि पहले के मुकाबले अब यात्रा मार्ग काफी सुगम हो गए हैं। पहले सड़कें खस्ताहाल थीं, जिससे श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। लेकिन आज व्यवस्थाएं बेहद शानदार हैं; बुनियादी सुविधाओं से लेकर साफ-सफाई के स्तर में बहुत बड़ा और सकारात्मक सुधार देखने को मिला है।
🟢 अभी सफर बाकी है- अब केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगोत्री की बारी
अमरनाथ के दर्शन बाबू गिरि की इस आध्यात्मिक यात्रा का अंतिम पड़ाव नहीं हैं। बाबा बर्फानी का आशीर्वाद लेने के बाद अब उन्होंने अपनी साइकिल का रुख उत्तराखंड की देवभूमि की ओर कर लिया है। यहाँ वे केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगोत्री धाम तक का सफर भी साइकिल से ही तय करेंगे। इस प्रकार उनकी यह पूरी यात्रा लगभग तीन महीने की हो जाएगी।
विदाई लेते हुए बाबू गिरि ने बड़े ही आत्मविश्वास से अपना संकल्प दोहराया:
“इस वर्ष बाबा बर्फानी के दर्शन पाकर मेरी यह यात्रा सफल रही। अब मैं केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगोत्री धाम के दर्शनों के लिए निकल रहा हूँ। अगले वर्ष अपनी इसी साइकिल पर भोले के दर्शनों के लिए फिर से वापस आऊंगा।”
🟢 शांतिपूर्वक जारी है अमरनाथ यात्रा
आपको बता दें कि इस वर्ष 3 जुलाई से शुरू हुई श्री अमरनाथ जी की वार्षिक यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और शांतिपूर्वक ढंग से चल रही है। अब तक दो लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं और देश-विदेश से भक्तों के आने का सिलसिला लगातार जारी है।
