उत्तराखंड उत्तरकाशी आपदा के 11 महीने बाद भी हर्षिल में सुरक्षा कार्य ठप, खतरा बढ़ने पर प्रशासन ने जारी किया भवनो को खाली करने का नोटिस जारी,,,
उत्तरकाशी: पिछले वर्ष (2025) आई भीषण आपदा के 11 महीने बीत जाने के बाद भी सीमांत क्षेत्र हर्षिल और धराली में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हो पाए हैं। वर्तमान में लगातार हो रही बारिश और भागीरथी नदी का जलस्तर बढ़ने से हर्षिल कस्बा एक बार फिर गंभीर खतरे की जद में है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने क्षेत्र के संवेदनशील सरकारी भवनों और स्थानीय संपत्तियों को खाली करने के नोटिस जारी कर दिए हैं।
🔴 मुख्य बिंदु
- प्रशासनिक कार्रवाई: भटवाड़ी की तहसीलदार अर्पिता गर्खाल के अनुसार, भागीरथी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए हर्षिल स्थित गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) के गेस्ट हाउस, थाना कोतवाली और अन्य संवेदनशील भवनों को खाली करने का नोटिस शुक्रवार को ही जारी कर दिया गया है। अन्य प्रभावित ढांचों को भी चिह्नित किया जा रहा है।
- आजीविका पर संकट: हर्षिल की पूर्व प्रधान बसंती नेगी और दिनेश रावत सहित स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुरक्षा कार्य न होने से सेब के बगीचे, होटल, होमस्टे और आवासीय संपत्तियां दांव पर लगी हैं। यदि समय रहते नदी तटबंधों को सुरक्षित नहीं किया गया, तो स्थानीय लोगों के सामने आजीविका और आवास का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
- अधूरी पड़ी झील: बीते वर्ष खीरगंगा और तेलगाड़ में आए मलबे के कारण भागीरथी का प्रवाह रुक गया था, जिससे गंगोत्री हाईवे के पास एक विशालकाय झील बन गई थी। यह झील आपदा के इतने महीनों बाद भी पूरी तरह खाली नहीं हो पाई है, जिससे खतरा लगातार बना हुआ है।
🔴 फ्लैशबैक- 2025 की आपदा का खौफनाक मंजर

गौरतलब है कि पिछले साल 5 अगस्त को आई आपदा ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी:
- खीरगंगा और तेलगाड़ के उफान से पूरा धराली कस्बा मलबे में दब गया था।
- इस आपदा में 7 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 68 लोग लापता हो गए थे (जिन्हें बाद में मृत घोषित किया गया)।
- तेलगाड़ नदी के उफान के कारण हर्षिल आर्मी कैंप के 9 जवान लापता हुए थे, जिनमें से दो के शव बरामद हुए थे।
- गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग करीब 20 दिनों तक जलमग्न रहा था, जिससे मुख्य मार्ग और धाम का संपर्क पूरी तरह कट गया था।

