उत्तराखंड ऋषिकेश बजरंग सेतु के कांच वाले हिस्से की सुरक्षा बढ़ी, कांवड़ मेले के दौरान यात्रियों के लिए रहेगा प्रतिबंधित,,,

ऋषिकेश। लक्ष्मणझूला के समीप नवनिर्मित बजरंग सेतु के पारदर्शी कांच वाले हिस्से की सुरक्षा को लेकर लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने कड़े कदम उठाए हैं। पूर्व में कुछ शरारती तत्वों द्वारा कांच को नुकसान पहुंचाए जाने की घटनाओं को देखते हुए अब यहां 24 घंटे सुरक्षा गार्डों की तैनाती कर दी गई है। इसके साथ ही पूरा कांच वाला हिस्सा पहले से ही सीसीटीवी कैमरों की तीसरी आंख की निगरानी में है।
आगामी कांवड़ मेले के दृष्टिगत लोक निर्माण विभाग द्वारा पुल के मुख्य (मध्य) हिस्से को खुला रखने का निर्णय लिया गया है, ताकि क्षेत्र में उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि, कांवड़ यात्रियों को इस पुल से गुजारने के संबंध में अंतिम निर्णय पुलिस प्रशासन द्वारा लिया जाएगा। सुरक्षा कारणों से कांवड़ यात्रियों का कांच वाले फुटपाथ पर आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
🟢 बजरंग सेतु की मुख्य विशेषताएं एवं सुरक्षा उपाय:
- लंबाई व चौड़ाई: पुल की कुल लंबाई 132.30 मीटर है, जिसका मध्य हिस्सा 5 मीटर चौड़ा है।
- कांच का फुटपाथ: पुल के दोनों ओर डेढ़-डेढ़ मीटर चौड़े फुटपाथ पर 65 मिमी मोटा पारदर्शी कांच लगाया गया है, जहां से नीचे बहती गंगा का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
- सुरक्षा रेलिंग: मध्य हिस्से और कांच वाले भाग को अलग करने के लिए लगी 3 फुट की रेलिंग को अब और ऊंचा किया जा रहा है ताकि पर्यटक इसे फांद न सकें।
🟢 कांवड़ मेले में भीड़ प्रबंधन को मिलेगा संबल
कांवड़ मेले के दौरान मुनिकीरेती, तपोवन, स्वर्गाश्रम और लक्ष्मणझूला क्षेत्रों में देश भर से आने वाले शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, जिन्हें नीलकंठ महादेव मंदिर की ओर जाना होता है। पिछले वर्षों तक इस मार्ग पर आवागमन के लिए केवल जानकी सेतु और रामझूला पुल ही उपलब्ध थे। रामझूला पुल काफी पुराना होने और उसकी मरम्मत प्रस्तावित होने के कारण उस पर दोपहिया वाहनों का संचालन प्रतिबंधित है, जिससे जानकी सेतु पर दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है। ऐसे में बजरंग सेतु के मध्य हिस्से का उपयोग पुलिस प्रशासन भीड़ को सुव्यवस्थित करने के लिए एक बेहतरीन विकल्प के रूप में कर सकेगा।
🟢 अनावश्यक आवाजाही रोकने के लिए टिकट लगाने पर विचार
बीते 4 जून को मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद, विभाग कांच वाले हिस्से में प्रवेश के लिए टिकट प्रणाली लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। लोनिवि अधिकारियों के अनुसार, टिकट व्यवस्था लागू होने से केवल गंभीर पर्यटक ही वहां जाएंगे, जिससे अनावश्यक तत्वों की आवाजाही रुकेगी और कांच के क्षतिग्रस्त होने का खतरा न्यूनतम हो जाएगा। मुख्य सचिव के निर्देशों के अनुपालन में ही दोनों हिस्सों को अलग करने वाली रेलिंग की ऊंचाई बढ़ाने का कार्य कांवड़ मेले से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि टिहरी और पौड़ी जिले को जोड़ने वाले करीब 100 वर्ष पुराने ऐतिहासिक लक्ष्मण झूला पुल के सुरक्षा कारणों से बंद होने के बाद, वर्ष 2022 में इसके समीप ही बजरंग सेतु का निर्माण शुरू किया गया था। कुछ समय पूर्व 50 मैक्स वाहनों को खड़ा कर और कांच वाले हिस्से पर सीमेंट-रेत की बोरियां रखकर इसकी भार क्षमता (लोड कैपेसिटी) का सफल परीक्षण किया जा चुका है। हालांकि पुल का अभी औपचारिक उद्घाटन होना बाकी है, लेकिन स्थानीय लोग और पर्यटक इसका उपयोग कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इसका विधिवत उद्घाटन कर दिया जाएगा।
आधिकारिक वक्तव्य: “बजरंग सेतु के कांच वाले हिस्से की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वहां 24 घंटे सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं। कांवड़ मेले के दौरान पुल का बीच वाला हिस्सा खुला रहेगा, जिसका उपयोग पुलिस प्रशासन भीड़ प्रबंधन के लिए कर सकता है। किसी भी परिस्थिति में कांवड़ यात्रियों को कांच वाले हिस्से में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।”- प्रवीण कर्णवाल, अधिशासी अभियंता (EE), लोनिवि, नरेंद्रनगर
