उत्तराखंड नैनीताल हाई कोर्ट हल्द्वानी शिफ्टिंग मामले में कैबिनेट से 30 हेक्टेयर भूमि को मिली मंजूरी, बेलबाबा में 15 हजार पौधों पर चलेगा कुल्हाड़ा,,,

हल्द्वानी। उत्तराखंड हाई कोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में स्थित प्लाट नंबर 46 और 47 की 73 हेक्टेयर वनभूमि में से 30 हेक्टेयर भूमि के हस्तांतरण को हरी झंडी दे दी है। हालांकि, इस फैसले के साथ ही एक नई पर्यावरणीय और आर्थिक चुनौती भी सामने आ खड़ी हुई है।
🔴 15 हजार पौधों पर चलेगा कुल्हाड़ा
हाल ही में मानसून सीजन के दौरान इसी वनभूमि (प्लाट नंबर 46 और 47) पर सघन पौधरोपण अभियान चलाया गया था। विभागीय सूत्रों के अनुसार, प्रति हेक्टेयर लगभग 500 पौधे और बीज रोपे गए थे। अब 30 हेक्टेयर भूमि के चयन के कारण यहाँ लगाए गए शीशम, खैर, जामुन, नीम और बेल जैसी प्रजातियों के लगभग 15 हजार पौधों को हटाना पड़ेगा।
🟢 60 से 75 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान
पर्यावरण और वानिकी विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रति हेक्टेयर पौधरोपण (भूमि की जुताई, तारबाड़ा, मेड़ निर्माण, बीज व पौध खरीद और मजदूरी) पर लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये की लागत आती है। इस हिसाब से 30 हेक्टेयर भूमि पर लगाए गए पौधों और व्यवस्थाओं पर खर्च हुए अनुमानित 60 से 75 लाख रुपये पानी में बहने का अंदेशा है।
🟢 पेचीदा हस्तांतरण प्रक्रिया और अधिकारियों की साधी चुप्पी
नियमानुसार, 2.25 हेक्टेयर से अधिक वनभूमि के हस्तांतरण के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (MoEFCC) की अंतिम स्वीकृति अनिवार्य होती है। यह प्रक्रिया रेंज स्तर से शुरू होकर डिवीजन, सर्किल, मुख्यालय और नोडल स्टेट के जरिए केंद्र तक जाती है।
चूंकि मामला सीधे उच्च न्यायालय से जुड़ा है, इसलिए वन विभाग के अधिकारी हस्तांतरण की समयसीमा और प्रक्रिया पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि शासन और उच्च स्तर से प्राप्त निर्देशों के तहत ही आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
