उत्तराखंड, समावेशी शिक्षा समय की आवश्यकता, विशेष बच्चों के लिए हुआ‘शाइन अवि विजुअल लर्निंग करिकुलम’ लॉन्च- पुष्कर सिंह धामी

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि शिक्षा तभी सार्थक होगी, जब वह हर बच्चे तक समान रूप से पहुंचे। उन्होंने समावेशी शिक्षा को समय की आवश्यकता बताते हुए राजपुर रोड स्थित एक स्थानीय होटल में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में ‘शाइन अवि विजुअल लर्निंग करिकुलम’ को लॉन्च किया।
‘ब्रिजिंग लर्निंग गैप्स थ्रू विजुअल लर्निंग एंड अर्ली इंटरवेंशन’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में मुख्यमंत्री ने शाइन अवि आटिज्म फाउंडेशन की संस्थापक अनीता शर्मा थपलियाल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संवेदनशील सोच, संकल्प और सकारात्मक विचार ही समाज में बदलाव लाते हैं।
🟢 रिवर्स पलायन का प्रेरक उदाहरण
मुख्यमंत्री ने अनीता शर्मा थपलियाल को रिवर्स पलायन का एक प्रेरक उदाहरण और ब्रांड एंबेसडर बताया। उन्होंने कहा:
”लगभग 30 वर्ष अमेरिका में रहने के बाद अनीता शर्मा अपनी जड़ों की ओर लौटी हैं और उन्होंने अपने अनुभवों को हजारों बच्चों के बेहतर भविष्य से जोड़ने का संकल्प लिया है। इस नेक पहल में पूरा उत्तराखंड उनके साथ खड़ा है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और सरकार की प्राथमिकता एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें कोई भी बच्चा पीछे न छूटे।
🟢 विशेष बच्चों के लिए 150 से अधिक पुस्तकें और संसाधन लॉन्च
कार्यक्रम के दौरान शाइन अवि विजुअल लर्निंग करिकुलम के तहत 150 से अधिक विशेष पुस्तकें और विजुअल लर्निंग संसाधन भी लॉन्च किए गए।
- लक्षित समूह: यह संसाधन उन बच्चों के लिए तैयार किए गए हैं जिन्हें भाषा, संचार, सामाजिक समझ, संज्ञानात्मक विकास, शैक्षणिक तैयारी और दैनिक जीवन कौशल विकसित करने में अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता होती है।
- पाठ्यक्रम का उद्देश्य: फाउंडेशन की संस्थापक अनीता शर्मा थपलियाल ने बताया कि इस करिकुलम का उद्देश्य अलग-अलग सीखने की जरूरत वाले बच्चों के लिए प्रभावी और सहज शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराना है।
🟢 थॉमस एडिसन का दिया उदाहरण
संगोष्ठी में मौजूद विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह विषय केवल राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक चिंता का विषय है। उन्होंने महान आविष्कारक थॉमस अल्वा एडिसन का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले, तो वे भी अपनी प्रतिभा से दुनिया को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि शाइन अवि की यह पहल ऐसे बच्चों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी।
