उत्तराखंड हरिद्वार पुलिस ने पेश की मानवता की मिसाल, अपनों ने फेरा मुंह तो पुलिस ने कराया “भंडारे वाले बाबा” का सम्मानजनक अंतिम संस्कार,,,,

हरिद्वार। “मित्रता, सेवा और सुरक्षा” का नारा देने वाली पुलिस जब अपनी ड्यूटी से आगे बढ़कर इंसानियत का हाथ थामती है, तो खाकी का गौरव और अधिक बढ़ जाता है। ऐसा ही एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक उदाहरण तीर्थ नगरी हरिद्वार में देखने को मिला, जहां अपनों की बेबसी के बाद हरिद्वार पुलिस ने एक लावारिस शव का पूरे रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर मानवता की नई मिसाल पेश की है।
🟢 श्रद्धालुओं के ‘भंडारे वाले बाबा’ के रूप में प्रसिद्ध थे रमाशंकर
बीती 9 जुलाई 2026 को पुलिस कंट्रोल रूम के समीप एक व्यक्ति का शव बरामद हुआ था। कोतवाली नगर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए शव को कब्जे में लिया और उसकी शिनाख्त के प्रयास शुरू किए। जांच के दौरान मृतक की पहचान 58 वर्षीय रमाशंकर गुप्ता के रूप में हुई, जो उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के रहने वाले थे। रमाशंकर गुप्ता पिछले कई वर्षों से हर की पौड़ी क्षेत्र में श्रद्धालुओं के सहयोग से छोटे-छोटे भंडारे आयोजित कराते थे, जिसके कारण वे स्थानीय स्तर पर “भंडारे वाले बाबा” के नाम से काफी लोकप्रिय थे।

🟢 आर्थिक तंगी बनी बाधा तो पुलिस बनी ‘परिवार’
शिनाख्त होने के बाद जब हरिद्वार पुलिस ने उत्तर प्रदेश में रह रहे उनके परिजनों से संपर्क किया, तो दिल झकझोर देने वाली सच्चाई सामने आई। परिजनों ने अपनी अत्यधिक आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए हरिद्वार आने और शव ले जाने में असमर्थता व्यक्त कर दी।
जब अपनों के कदम मजबूरी में थम गए, तब हरिद्वार पुलिस ने उनका सहारा बनने का फैसला किया। 12 जुलाई 2026 को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, कोतवाली नगर हरिद्वार पुलिस ने रमाशंकर जी के पार्थिव शरीर को लावारिस नहीं छोड़ने का संकल्प लिया।
🟢 खड़खड़ी श्मशान घाट पर हिंदू रीति-रिवाज से दी विदाई
पुलिसकर्मियों ने खुद परिवार की भूमिका निभाई और मृतक रमाशंकर गुप्ता के शव को खड़खड़ी श्मशान घाट ले गए। वहां पूरी श्रद्धा, सम्मान और हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।
हरिद्वार पुलिस ने रमाशंकर जी के पार्थिव शरीर को लावारिस नहीं छोड़ने का संकल्प लिया।
🟢 खड़खड़ी श्मशान घाट पर हिंदू रीति-रिवाज से दी विदाई

पुलिसकर्मियों ने खुद परिवार की भूमिका निभाई और मृतक रमाशंकर गुप्ता के शव को खड़खड़ी श्मशान घाट ले गए। वहां पूरी श्रद्धा, सम्मान और हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया। पुलिसकर्मियों ने नम आंखों से “भंडारे वाले बाबा” को अंतिम विदाई दी, जिन्होंने कभी न जाने कितने भूखों का पेट भरा था।
“सेवा, संवेदना और मानवता ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”- हरिद्वार पुलिस
पुलिसकर्मियों ने नम आंखों से “भंडारे वाले बाबा” को अंतिम विदाई दी, जिन्होंने कभी न जाने कितने भूखों का पेट भरा था।
