उत्तर प्रदेश अयोध्या राम मंदिर दान प्रकरण में 3 सदस्यीय SIT ने सौंपी 150 पन्नों की जांच रिपोर्ट, किसी को नहीं मिली क्लीन चिट,,,,,

अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या राम मंदिर दान और चढ़ावा प्रकरण में वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी पहली प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। लखनऊ मंडल के आयुक्त (कमिश्नर) विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में गठित 3-सदस्यीय SIT ने यह रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी। सूत्रों के मुताबिक, बेहद गोपनीय तरीके से तैयार की गई इस रिपोर्ट में जांच टीम ने किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित व्यक्ति को क्लीन चिट नहीं दी है।
🔴 जांच रिपोर्ट के मुख्य खुलासे और सिफारिशें
SIT द्वारा गृह विभाग को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर के चढ़ावे और दान राशि के रख-रखाव को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- प्रक्रियात्मक खामियां (Procedural Lapses): जांच में सामने आया है कि दान के पैसों और चढ़ावे के प्रबंधन (Management) में स्थापित नियमों की अनदेखी की गई। निगरानी और गणना की व्यवस्था में कई गंभीर प्रक्रियात्मक कमियां पाई गई हैं।
- केस दर्ज करने की सिफारिश: प्राथमिक रूप से दोषी पाए गए कुछ कर्मचारियों और पदाधिकारियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा (FIR) दर्ज करने और उनके विरुद्ध सख्त विभागीय कार्रवाई शुरू करने की संस्तुति की गई है।
- जांच के दायरे में दिग्गज: ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी इस समय SIT की रडार पर हैं। किसी को भी राहत नहीं दी गई है।
🔴 10 से 15 दिनों में आएगी अंतिम रिपोर्ट: बढ़ेगी हलचल
SIT के अधिकारियों के अनुसार, गृह विभाग को सौंपी गई यह रिपोर्ट केवल एक प्रारंभिक (Preliminary) रिपोर्ट है। मामले की संवेदनशीलता और व्यापकता को देखते हुए गहन छानबीन अभी जारी है।
”अगला कदम: जांच टीम आने वाले 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत और अंतिम (Final) जांच रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में बड़े स्तर पर कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।”
कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अगुवाई में हुई इस प्रारंभिक कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में पूरी पारदर्शिता और सख्ती बरतने के मूड में है। अब गृह विभाग और शासन स्तर पर अंतिम रिपोर्ट और आगामी एफआईआर (FIR) को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं।
