उत्तराखंड के चमोली जिले में थराली CHC के पास सरकारी दवाइयों का जखीरा जलाने पर मचा बवाल, स्थानीय जनता ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग,,,,

चमोली (उत्तराखंड): उत्तराखंड के चमोली जिले से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। थराली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के समीप कथित रूप से भारी मात्रा में जली हुई सरकारी दवाइयों का जखीरा मिलने से हड़कंप मच गया है। इस घटना के बाद से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है और मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग तेज हो गई है।
🔴 एक्सपायरी या लापरवाही? किसके आदेश पर सुलगती रहीं दवाइयां
जानकारी के अनुसार, थराली सीएचसी के पास बड़ी संख्या में दवाइयों के जले हुए अवशेष पाए गए हैं। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग के दवा प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
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- नियमों का उल्लंघन: यदि यह दवाइयां सरकारी स्टॉक का हिस्सा थीं, तो बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण (Disposal) के तय नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया?
- जिम्मेदारी तय नहीं: इन दवाइयों को किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में आग के हवाले किया गया, यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है।
- बड़ा सवाल: सबसे अहम जांच का विषय यह है कि क्या ये दवाइयां सचमुच एक्सपायर हो चुकी थीं, या फिर अस्पताल में उपयोग योग्य दवाओं को ही ठिकाने लगा दिया गया।
🔴 निशुल्क दवा दावों की खुली पोल
एक तरफ प्रदेश सरकार सरकारी अस्पतालों में मरीजों और प्रसूताओं को शत-प्रतिशत निशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ अस्पतालों में अक्सर मरीजों को दवा न होने की शिकायतें मिलती हैं। ऐसे में इतनी बड़ी तादाद में दवाओं का जलाया जाना विभाग के भंडारण और निगरानी तंत्र की विफलता को दर्शाता है।
🔴 विवादों से पुराना नाता: पहले भी सुर्खियों में रहा है थराली CHC
यह पहला मौका नहीं है जब थराली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सवालों के घेरे में आया है। इससे पहले भी इस अस्पताल में गैर-चिकित्सकीय कर्मचारियों (Non-medical staff) द्वारा आपातकालीन मरीजों का इलाज किए जाने के गंभीर आरोप लग चुके हैं। इस नए घटनाक्रम के बाद स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन में जवाबदेही नाम की कोई चीज नहीं रह गई है।
🟢 निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
क्षेत्रवासियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। स्थानीय लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि जांच में स्वास्थ्य विभाग के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो उसके खिलाफ तत्काल कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा इस संवेदनशील मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच में क्या कड़वे सच सामने आते हैं।
