उत्तराखंड, विश्वविद्यालयों का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि सक्षम और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित युवाओं का निर्माण करना है- लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (राज्यपाल)

देहरादून(विशेष संवाददाता): कुलाधिपति एवं राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने मंगलवार को लोक भवन में प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली को छात्र-केंद्रित, गुणवत्तापूर्ण एवं भविष्योन्मुख शिक्षा व्यवस्था के रूप में विकसित करने का जोरदार आह्वान किया।
“उत्तराखंड राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने ली कुलपतियों की समीक्षा बैठक, शिक्षा व्यवस्था को भविष्योन्मुख और छात्र-केंद्रित बनाने का आह्वान”
राज्यपाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विश्वविद्यालयों का मुख्य उद्देश्य केवल छात्रों को डिग्री प्रदान करना तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे सक्षम, आत्मविश्वासी और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित युवाओं का निर्माण करना है जो रोजगार, उद्यमिता और 21वीं सदी की हर चुनौती का सफलतापूर्वक सामना कर सकें।
🟢 मुख्य बिंदु
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों, चुनौतियों, शोध एवं अनुसंधान गतिविधियों के साथ-साथ रिक्त पदों की भर्ती की प्रगति की गहन समीक्षा की और कुलपतियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
🟢 उद्योग और समय की मांग के अनुरूप हो शिक्षा
बैठक में राज्यपाल ने कुलपतियों से कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को उद्योग और बदलते समय की आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिक जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों की नैतिक शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और समग्र विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने एक सकारात्मक एवं सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने को कहा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक स्वस्थ परिसर संस्कृति ही विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
🟢 परीक्षा प्रणाली में एआई और आधुनिक तकनीक का प्रयोग
परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और शुचिता पर विशेष जोर देते हुए राज्यपाल ने आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के व्यापक उपयोग के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और लीक-प्रूफ बनाया जाना चाहिए। प्रत्येक स्तर पर सुदृढ़ जांच और पुनः जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि परीक्षा प्रणाली त्रुटिरहित और पूरी तरह भरोसेमंद बन सके।
🟢 संस्थानों की पहचान भवनों से नहीं, शोध और नवाचार से होती है
राज्यपाल ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की असली पहचान केवल उसके भव्य भवनों से नहीं, बल्कि उसकी शैक्षणिक उत्कृष्टता, उच्च स्तरीय शोध, नवाचार और उपलब्धियों से आंकी जाती है। उन्होंने एनआईआरएफ (NIRF) और एनएएसी (NAAC) रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए शोध, पेटेंट, नवाचार, गुणवत्तापूर्ण आधारभूत संरचना और अकादमिक उत्कृष्टता पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।
🟢 भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता
विश्वविद्यालयों में शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने इसे पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध ढंग से पूरा करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी नियुक्तियां निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP), आधुनिक तकनीक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विश्वविद्यालयों को विकसित करने के लिए दूरदृष्टि के साथ कार्य करने का आग्रह किया।
बैठक के अंत में सभी कुलपतियों ने अपने-अपने विश्वविद्यालयों की हालिया उपलब्धियों, चल रहे शैक्षणिक एवं शोध कार्यों तथा भविष्य की विकासात्मक योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
