उत्तराखंड ग्राम पंचायतों में 15 अगस्त तक स्थापित होंगी ‘पंचवटी वाटिकाएं’, डॉ. पराग मधुकर धकाते ने जारी किए निर्देश,,,

देहरादून। पर्यावरण संरक्षण, हरियाली विस्तार और पारंपरिक वृक्ष संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तराखंड की ग्राम पंचायतों में ‘पंचवटी वाटिकाएं’ विकसित की जाएंगी। पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने प्रथम चरण के तहत चार जिलों की 15,75 ग्राम पंचायतों में 15 अगस्त तक यह वाटिकाएं स्थापित करने के लिए संबंधित डीपीआरओ (DPRO) को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
🟢 योजना से जुड़ी मुख्य बातें
- विशेष वृक्ष प्रजातियां: इन वाटिकाओं में भारतीय परंपरा में पूजनीय पांच मुख्य पौधे—पीपल, बरगद, अशोक, बेल और आंवला रोपित किए जाएंगे।
- जिलेवार लक्ष्य (कुल 1575 ग्राम पंचायतें):
- नैनीताल: 475
- देहरादून: 409
- ऊधम सिंह नगर: 373
- हरिद्वार: 318
- भूमि व दूरी का मानक: प्रत्येक ग्राम पंचायत में न्यूनतम 2500 वर्ग फीट भूमि चिन्हित की जाएगी। पीपल और बरगद जैसे विशाल वृक्षों के पर्याप्त विस्तार के लिए वैज्ञानिक दूरी और सही दिशा के अनुसार पौधारोपण होगा।
- सुरक्षा व रखरखाव: पौधों को ट्री-गार्ड/फेंसिंग, जैविक खाद, नियमित सिंचाई और जियो-टैग्ड (Geo-tagged) फोटोग्राफी से सुरक्षित किया जाएगा। हर वाटिका में एक सूचना पट्ट भी लगाया जाएगा। वन और उद्यान विभाग की नर्सरियों से पौधे मिलेंगे।
- जिम्मेदारी: वाटिकाओं के संरक्षण और देखरेख की प्राथमिक जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VDO) की होगी, जबकि खंड विकास अधिकारी (BDO) समय-समय पर निरीक्षण करेंगे।
विशेष सचिव का संदेश:
“गांवों में हरियाली बढ़ाने और पूजनीय वृक्षों के संरक्षण के लिए यह कदम उठाया गया है। ये वाटिकाएं पर्यावरण संरक्षण का केंद्र बनेंगी और आने वाले वर्षों में ग्राम पंचायतों की नई पहचान बनेंगी।” + डॉ. पराग मधुकर धकाते, विशेष सचिव, पंचायती राज
