उत्तराखंड में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट पर मई से बिछेगा नया ट्रैक, दिसंबर तक ट्रायल ट्रेन चलाने की तैयारी, सफर का समय रह जाएगा आधा,,,

ऋषिकेश: उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) आगामी मई महीने से शिवपुरी और ब्यासी के बीच पटरी (ट्रैक) बिछाने का कार्य शुरू करने जा रहा है। परियोजना की गति को देखते हुए इस वर्ष के अंत या जनवरी 2027 तक इस 13 किलोमीटर लंबे खंड पर पहली ट्रायल ट्रेन चलाने की योजना है।
ट्रायल ट्रेन के लिए विशेष तैयारी
आरवीएनएल के अनुसार, ट्रायल के लिए एक इंजन और एक बोगी को परियोजना स्थल पर ही असेंबल किया जाएगा। वर्तमान में ऋषिकेश में चंद्रभागा नदी पर बने पुल पर ट्रैक बिछाने का काम पूरा हो चुका है। हालांकि, ढालवाला से शिवपुरी के बीच 10.8 किलोमीटर लंबी सुरंग की खोदाई का काम अभी शेष है, जिसे जल्द गति दी जाएगी।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं:
- दूरी और समय: 125 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के शुरू होने से ऋषिकेश से कर्णप्रयाग का सफर 6 घंटे से घटकर मात्र 2.5 घंटा रह जाएगा।
- सुरंगों का जाल: परियोजना का लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा (104 किमी) सुरंगों के भीतर होगा। इसमें कुल 16 मुख्य और 12 निकास सुरंगें शामिल हैं।
- पुलों का निर्माण: गहरी घाटियों और नदियों के ऊपर 19 प्रमुख और 31 छोटे पुलों का निर्माण किया जा रहा है।
- स्टेशन नेटवर्क: कुल 13 स्टेशनों में से वीरभद्र और योगनगरी ऋषिकेश चालू हैं। शिवपुरी और ब्यासी में काम प्रगति पर है, जबकि शेष 9 स्टेशनों के लिए मई से काम शुरू होने की उम्मीद है।
सामरिक और आर्थिक महत्व
यह रेल परियोजना न केवल गढ़वाल के पांच जिलों (देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली) को देश के रेल नेटवर्क से जोड़ेगी, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे चारधाम यात्रा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सड़क मार्ग पर निर्भरता कम होगी।
लक्ष्य और भविष्य की योजना
आरवीएनएल के उप महाप्रबंधक (सिविल) ओपी मालगुड़ी ने बताया कि परियोजना के विद्युत और सिग्नलिंग का कार्य अक्टूबर 2026 से प्रारंभ किया जाएगा। संपूर्ण परियोजना को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कर्णप्रयाग स्टेशन को एक बड़े टर्मिनस के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ 26 रेलवे लाइनें बिछाई जाएंगी।
