उत्तराखंड के नीचे पृथ्वी की परत पाई गई अत्यधिक मोटी, अध्ययन में मिले ‘डबल मोहो’ और मजबूत भारतीय प्लेट के संकेत,,,,

देहरादून। एक नए भू-वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि उत्तराखंड हिमालय के नीचे पृथ्वी की ऊपरी परत सामान्य क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक मोटी है। शोध में उत्तराखंड के नीचे ‘मोहो’ (Crust-Mantle Boundary) की गहराई 30 से 55 किलोमीटर के बीच पाई गई है, जो विशाल हिमालय पर्वतमाला को संतुलन और सहारा प्रदान करने में मुख्य भूमिका निभाती है।
🟢 प्रमुख निष्कर्ष एवं मुख्य बिंदु
- मोहो (Moho) की गहराई: 30 से 55 किमी, जो अत्यधिक मोटी क्रस्ट (भूपर्पटी) को दर्शाती है।
- LAB की पहचान: लिथोस्फीयर-एस्थेनोस्फीयर सीमा 130 से 180 किमी की गहराई पर दर्ज।
- प्लेट की स्थिति: भारतीय टेक्टोनिक प्लेट की मजबूती और उत्तर दिशा की ओर निरंतर बढ़ाव की पुष्टि।
- विशेष भूगर्भिक संरचना: प्राचीन प्लेटों के टकराव से ‘डबल मोहो’ के संकेत मिले।
🟢 लिथोस्फीयर-एस्थेनोस्फीयर सीमा (LAB) की खोज
शोध में वैज्ञानिकों ने लिथोस्फीयर (पृथ्वी की कठोर बाहरी परत) और एस्थेनोस्फीयर (नीचे स्थित नरम/गर्म परत) के बीच की सीमा (LAB) की स्पष्ट पहचान की है। उत्तराखंड के नीचे यह सीमा 130 से 180 किलोमीटर की गहराई पर स्थित है। इससे यह प्रमाणित होता है कि यहां भारतीय प्लेट काफी मोटी, मजबूत और सक्रिय रूप से उत्तर की ओर खिसक रही है।
🟢 डबल मोहो’ के संकेत और प्राचीन टकराव

अध्ययन के दौरान कुछ स्थानों पर ‘डबल मोहो’ जैसी अनोखी संरचना के संकेत भी मिले हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, करोड़ों वर्ष पूर्व भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की भीषण टक्कर के दौरान पृथ्वी की परतें आपस में इस प्रकार उलझ गईं कि दो अलग-अलग सीमाएं बनती दिखाई देती हैं। हालांकि, इस जटिल संरचना को पूरी तरह समझने के लिए आगे और अध्ययन की आवश्यकता जताई गई है।
