उत्तराखंड भ्रष्टाचार पर धामी सरकार का कड़ा प्रहार, आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय और पेयजल विभाग के अधिकारियों पर दी मुकदमा दर्ज करने की अनुमति,,,

देहरादून: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को धरातल पर उतारते हुए दो बड़े मामलों में विजिलेंस को मुकदमा दर्ज करने की हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री ने राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति के बाद यह निर्णय लिया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय: नियुक्तियों और प्रवेश में बड़ी धांधली
देहरादून के हर्रावाला स्थित आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में पिछले कई वर्षों से चल रही अनियमितताओं की विजिलेंस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने निम्नलिखित बिंदुओं पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं:
- नियम विरुद्ध नियमितीकरण: वर्ष 2013-14 के दौरान मिनिस्ट्रियल संवर्ग के कर्मचारियों को नियमों को ताक पर रखकर नियमित किया गया।
- अवैध पदोन्नति: वर्ष 2014-15 में कई कर्मचारियों को बिना पात्रता और नियमों के विरुद्ध प्रमोशन दिया गया।
- NEET प्रवेश घोटाला: वर्ष 2022-23 में NEET प्रक्रिया के माध्यम से हुए कुछ छात्र दाखिलों में भारी संदिग्धता पाई गई है।
इन मामलों में अब विजिलेंस औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसेगी।
पेयजल विभाग: अधीक्षण अभियंता पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप
भ्रष्टाचार का दूसरा बड़ा मामला पेयजल विभाग से सामने आया है। सरकार ने विभाग के अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) सुजीत कुमार विकास के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है।
मुख्य आरोप: अधिकारी पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने और विभागीय निविदाओं व कार्यों में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं बरतने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर मुख्यमंत्री का रुख
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी तंत्र में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार के इस फैसले को उन अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी माना जा रहा है जो अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।
निष्कर्ष:
- विजिलेंस अब इन मामलों में स्वतंत्र रूप से साक्ष्य जुटाकर गिरफ्तारियां कर सकेगी।
- आगामी दिनों में कुछ अन्य विभागों के ‘बड़े नामों’ पर भी गाज गिर सकती है।
- प्रशासनिक सुधार की दिशा में इसे धामी सरकार का अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
