उत्तराखंड मानसून को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अहम बैठक कर आपदा प्रबंधन तंत्र को दिए 24×7 अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश,,,

देहरादून। उत्तराखंड में आगामी मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और जन-धन की हानि को न्यूनतम करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बेहद गंभीर नज़र आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मानसून-पूर्व राज्य स्तरीय ‘मॉक ड्रिल’ का बारीकी से निरीक्षण किया और प्रदेश के आपदा प्रबंधन तंत्र की तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी अधिकारियों और विभागों को आगामी महीनों में 24 घंटे यानी ’24×7 अलर्ट मोड’ में रहना होगा।
🟢 कंट्रोल रूम से संवेदनशील क्षेत्रों की पल-पल की निगरानी
मुख्यमंत्री ने देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (कंट्रोल रूम) का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं को देखा। इस कंट्रोल रूम से पूरे प्रदेश में मानसून से जुड़ी गतिविधियों, मौसम के बदलते मिजाज और भूस्खलन व बाढ़ के लिहाज से बेहद संवेदनशील (vulnerable) क्षेत्रों की सैटेलाइट और आधुनिक तकनीकों के जरिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी विषम परिस्थिति या आपात स्थिति में बिना समय गंवाए तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
🟢 राहत कार्यों में ढिलाई बर्दाश्त नहीं- त्वरित समन्वय पर जोर
अधिकारियों को कड़े शब्दों में हिदायत देते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को ‘आपसी समन्वय’ (Inter-departmental Coordination) को मजबूत करने के निर्देश दिए ताकि सूचना मिलते ही तुरंत रिस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंच सके।
🟢 धामी सरकार की ‘प्रो-एक्टिव’ कार्यशैली
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री धामी की कार्यशैली हमेशा से ‘प्रो-एक्टिव’ (आपदा आने से पहले ही सचेत रहना) रही है। सरकार का मुख्य फोकस इस बात पर है कि आपदा आने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही सुरक्षात्मक और बचाव संबंधी तैयारियों को इतना मजबूत कर लिया जाए कि नुकसान को बेहद कम किया जा सके।
पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश ने कई बड़ी प्राकृतिक आपदाओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया है। लेकिन सरकार की पूर्व तैयारी, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और विभागों के बीच प्रभावी समन्वय के कारण ही जन-धन की हानि को काफी हद तक नियंत्रित रखने में सफलता मिली है।
🟢 आपदा के समय अग्रिम पंक्ति में रहते हैं मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहचान एक ऐसे संवेदनशील और सक्रिय नेता के रूप में है, जो हर बड़ी आपदा के दौरान खुद ग्राउंड जीरो पर उतरते हैं। वे केवल आपदा नियंत्रण कक्ष से निर्देश नहीं देते, बल्कि स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत और बचाव कार्यों की कमान संभालते हैं। आपदा की घड़ी में अधिकारियों का नेतृत्व करते हुए अग्रिम पंक्ति में खड़े रहना और प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर उन्हें हर संभव मदद का भरोसा देना, उनकी कार्यशैली का एक अहम हिस्सा रहा है।
🟢 आधुनिक संसाधनों और मशीनरी की अग्रिम तैनाती
राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आपदा के बाद राहत सामग्री बांटना नहीं है, बल्कि ‘त्वरित प्रतिक्रिया’ (Quick Response) और ‘प्रभावी प्रबंधन’ के माध्यम से आपदा के प्रभाव को कम करना है। इसके लिए मानसून शुरू होने से पहले ही राज्य के सभी संवेदनशील और दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों में:
- जेसीबी और भारी मशीनरी,
- पर्याप्त मात्रा में राशन और आवश्यक राहत सामग्री,
- एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF) और स्थानीय बचाव दल,
- तथा आवश्यक चिकित्सा संसाधनों
की अग्रिम तैनाती (Pre-positioning) सुनिश्चित कर दी गई है। मुख्यमंत्री धामी के इस कुशल नेतृत्व में उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन तंत्र अब पहले से कहीं अधिक आधुनिक, सशक्त और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली प्रणाली के रूप में उभर रहा है।
