उत्तराखंड में मानसून का यू-टर्न, IMD द्वारा भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, देहरादून और नैनीताल में स्कूल बंद, प्रशासन 24×7 सतर्क,,,

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर विकराल रूप धारण करते हुए अपनी रफ्तार पकड़ ली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगामी 9 और 10 जुलाई के लिए प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश, आकाशीय बिजली चमकने और तीव्र बौछारें पड़ने की गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग की इस चेतावनी के बाद राज्य सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गए हैं। बुधवार देर रात से ही राजधानी देहरादून समेत राज्य के तमाम मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश का सिलसिला लगातार जारी है, जिससे संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
🔴 सुरक्षा के मद्देनजर देहरादून और नैनीताल में शैक्षणिक संस्थान बंद
भारी बारिश के कारण उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों और छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देहरादून और नैनीताल जिलों के जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। दोनों ही जनपदों में 9 जुलाई को सभी सरकारी, गैर-सरकारी (निजी) और अशासकीय स्कूलों के साथ-साथ सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में एहतियातन अवकाश घोषित कर दिया गया है। जिलाधिकारियों ने अभिभावकों और छात्र-छात्राओं से अपील की है कि वे मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें।
🔴 9 और 10 जुलाई के लिए अलर्ट का जिलावार वर्गीकरण
मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भौगोलिक संवेदनशीलता के आधार पर राज्य के जिलों को अलर्ट श्रेणियों में विभाजित किया है:
- 9 जुलाई 2026 (ऑरेंज अलर्ट): देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, और चम्पावत। इन जिलों में तेज बौछारें और आकाशीय बिजली गिरने की अत्यधिक संभावना है।
- 9 जुलाई 2026 (येलो अलर्ट): उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर, और पिथौरागढ़।
- 10 जुलाई 2026 (ऑरेंज अलर्ट): पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, चम्पावत, और बागेश्वर।
- 10 जुलाई 2026 (येलो अलर्ट): देहरादून, टिहरी गढ़वाल, हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा, और पिथौरागढ़।
नोट: मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इन क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर तीव्र जलभराव, नदी-नालों में उफान और संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन (Landslides) हो सकता है।
🔴 राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) के सख्त निर्देश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) ने सभी जिलाधिकारियों (DMs) को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को स्पष्ट तौर पर निर्देशित किया गया है कि:
- संवेदनशील तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की चौबीसों घंटे लगातार निगरानी की जाए।
- राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और स्थानीय राहत एवं बचाव दलों को 24 घंटे मुस्तैद रखा जाए।
- पहाड़ी और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति पर निरंतर नजर रखी जाए ताकि मार्ग अवरुद्ध होने पर तत्काल खोला जा सके।
- आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों (स्वास्थ्य, पुलिस, लोक निर्माण विभाग) के बीच आपसी समन्वय मजबूत रहे।
🟢 शासन की आम जनता से विशेष अपील
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने प्रदेशवासियों और उत्तराखंड आने वाले यात्रियों से मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेने का आग्रह किया है। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक एडवाइजरी के मुख्य बिंदु:
- नागरिक वर्तमान परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक यात्रा से पूरी तरह बचें।
- पर्वतीय एवं भूस्खलन के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में जाने का जोखिम न उठाएं।
- नदी, नालों और बरसाती गधेरों के समीप या उनके पार जाने का प्रयास न करें।
- खराब मौसम के दौरान सुरक्षित पक्के भवनों में ही शरण लें।
- किसी भी आकस्मिक संकट की स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन अथवा जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें।
- अफवाहों से दूर रहें और केवल सरकारी व आधिकारिक स्रोतों से जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
🔴 24×7 अलर्ट मोड पर तैनात है प्रशासनिक अमला
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं, रसद, भारी मशीनरी और मानव बल की उपलब्धता अग्रिम चौकियों और संवेदनशील तहसीलों में सुनिश्चित कर दी गई है। राज्य का संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र चौबीसों घंटे (24×7) मुस्तैद है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में न्यूनतम रिस्पांस टाइम के साथ राहत कार्य शुरू किया जा सके।
