उत्तराखंड हरिद्वार जीवित पत्नी का ‘पिंडदान’ करने वाले वायरल वीडियो पर महिला ने किया पलटवार, पति पर लगाए गंभीर आरोप,,,,,
हरिद्वार/देहरादून। कुछ दिन पहले धर्मनगरी हरिद्वार के हरकी पैड़ी से एक सनसनीखेज वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति को अपनी जीवित पत्नी की तस्वीर पर माला चढ़ाकर उसका ‘पिंडदान’ करते देखा गया। अब इस मामले में पीड़ित महिला का बयान सामने आया है, जिसने अपने पति के दावों को सिरे से खारिज करते हुए मामले को नया मोड़ दे दिया है।
सोशल मीडिया पर दी सफाई: “मैं जागरूक हूँ, झुकूँगी नहीं”
सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में महिला ने स्पष्ट किया कि उसका और उसके पति का विवाद काफी समय से चल रहा है और वर्तमान में वे देहरादून कोर्ट में तलाक का केस लड़ रहे हैं। पति द्वारा रील बनाने के आरोपों पर महिला ने कहा:
- वह रील जरूर बनाती है, लेकिन उसमें कुछ भी अभद्र या आपत्तिजनक नहीं होता।
- पति शराब पीकर अक्सर उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज करता था।
- तस्वीर का गंगा में विसर्जन कर अपमान करना उसकी छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश है।
“हर सिक्के के दो पहलू होते हैं”
महिला ने भावुक होते हुए कहा कि समाज ने बिना सच्चाई जाने उसे ट्रोल किया और अभद्र टिप्पणियां कीं। महिला के अनुसार:
”लोगों ने केवल एक पक्ष देखा और अपनी प्रतिक्रिया दे दी। इस घटना से मेरी छवि को गहरा धक्का लगा है। मैं कोई गलत कदम भी उठा सकती थी, लेकिन अपने बच्चों की खातिर मैंने खुद को संभाला। मैं एक जागरूक महिला हूँ और समाज के गलत दबाव के आगे नहीं झुकूँगी।”
क्या था पूरा मामला?
तीन दिन पूर्व एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें देहरादून निवासी एक व्यक्ति हरकी पैड़ी पर अपनी पत्नी की फोटो के साथ अशोभनीय व्यवहार कर रहा था। उसने फोटो को गंगा में प्रवाहित कर दिया, जिसे सांकेतिक रूप से ‘जीवित का पिंडदान’ कहा गया। इस घटना के पीछे पति ने तर्क दिया था कि वह पत्नी की रील बनाने की आदत से परेशान है।
तीर्थ पुरोहितों और हिंदू संगठनों में रोष
इस कृत्य ने न केवल सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा किया, बल्कि हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों और हिंदूवादी संगठनों ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
- अशोभनीय कृत्य: पुरोहितों का कहना है कि पवित्र गंगा घाट पर इस तरह का तमाशा करना धार्मिक मर्यादाओं के विरुद्ध है।
- कार्रवाई की मांग: विभिन्न संगठनों ने आरोपी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है ताकि तीर्थ स्थल की गरिमा बनी रहे।
फिलहाल यह पारिवारिक विवाद अब सार्वजनिक चर्चा और कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया है। पुलिस और प्रशासन इस मामले में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने और सार्वजनिक स्थान पर अशोभनीय व्यवहार के दृष्टिकोण से जांच कर सकते हैं।

