दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, वन्यजीवों के लिए वरदान साबित हुआ 12 किमी का एलिवेटेड कॉरिडोर सुरक्षित आवाजाही और कम हुआ टकराव,,,

देहरादून। सहारनपुर के गणेशपुर से देहरादून के आशारोड़ी के बीच बने एशिया के सबसे लंबे एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर ने वन्यजीवों की राह बेहद आसान और सुरक्षित बना दी है। लगभग 12 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में बनाए गए अंडरपास और विशेष हाथी मार्गों से वन्यजीव बिना किसी बाधा के आवाजाही कर रहे हैं, जिससे वाहनों और जंगली जानवरों के बीच टकराव की आशंका नगण्य हो गई है।
🟢 कैमरा ट्रैप में कैद हुई वन्यजीवों की सक्रियता

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) और लैंडस्केप्स रिकनेक्टेड के अध्ययन के अनुसार, करीब 40 दिनों चले कैमरा ट्रैप सर्वे में 1.11 लाख से अधिक तस्वीरें ली गईं। इनमें से 40,444 तस्वीरों में हाथी, बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल और नीलगाय समेत कुल 18 प्रमुख वन्यजीव प्रजातियां अंडरपास का उपयोग करती हुई नजर आईं, जिनमें हाथियों द्वारा करीब 60 बार कॉरिडोर का इस्तेमाल किया जाना शामिल है।
🟢 बढ़ती संख्या और तेंदुओं के शावकों की मौजूदगी
मोहंड क्षेत्र में मादा तेंदुओं और उनके शावकों की चहलकदमी अनुकूल वातावरण का बड़ा संकेत है। शिवालिक क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या बढ़कर 80 से 90 और हाथियों की संख्या 50 से 60 के बीच पहुंचने का अनुमान लगाया गया है, जो इस कॉरिडोर की सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
🟢 साउंडप्रूफ शीट की सुरक्षा और मौजूदा चुनौतियां
वाहनों के शोर और रोशनी से वन्यजीवों को बचाने के लिए कॉरिडोर पर विशेष साउंडप्रूफ शीट लगाई गई थीं, ताकि उनकी सामान्य गतिविधियां प्रभावित न हों। हालांकि, कुछ महीनों के भीतर ही कई स्थानों पर इन सीटों के क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई है, जिस पर ध्यान देना आवश्यक है।
🟢 विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों और वन अधिकारियों का मानना है कि इस कॉरिडोर के संचालन से शिवालिक वन क्षेत्र में वन्यजीवों का आवागमन काफी सुगम हुआ है। मोहंड रेंज अब जंगली जानवरों के लिए पहले की तुलना में अधिक अनुकूल बन चुकी है, जिससे वन्यजीवों की संख्या में लगातार सकारात्मक वृद्धि दर्ज की जा रही है।
