उत्तराखंड हरीश रावत का बड़ा कदम: पूर्व ओएसडी पर ईडी की कार्रवाई के बाद कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से दिया इस्तीफा,,,

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीतिक हलचल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस पार्टी के भीतर अपने पदों से हटने की घोषणा की है। उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। यह निर्णय उनके पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामलों के बीच सामने आया है।
🔴 सोशल मीडिया पर दी इस्तीफे की जानकारी
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट के माध्यम से हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि उनके सहयोगी के आवास से भारी मात्रा में नकदी और आभूषण मिलने की खबरें चर्चा में हैं। उन्होंने कहा कि यदि ग्राम सेवक भर्ती परीक्षा या ओएमआर शीट से छेड़छाड़ के मामले में चंदन सिंह जीना दोषी पाए जाते हैं, तो यह उनके लिए अत्यंत शर्मिंदगी का विषय होगा। हालांकि, उन्होंने जीना पर लगे आरोपों पर संदेह भी व्यक्त किया।
🔴 पार्टी हित को बताया सर्वोपरि
हरीश रावत ने जोर देकर कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस पार्टी और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर होकर संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे संवेदनशील समय में उनकी वजह से पार्टी के संघर्ष और उसकी छवि पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए। इसी नैतिक जिम्मेदारी के चलते उन्होंने संगठनात्मक पदों से हटने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि वह वर्तमान में किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए उनके इस्तीफे का संबंध केवल पार्टी संगठन से है।
🔴 भर्ती परीक्षाओं और आयोग के गठन पर सफाई
अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए रावत ने कहा कि राज्य के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए ही अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन किया गया था। उनके तीन वर्ष के कार्यकाल के दौरान 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां की गईं। उन्होंने स्वीकार किया कि यदि इस पूरी चयन प्रक्रिया के दौरान उनसे किसी स्तर पर ‘एरर ऑफ जजमेंट’ हुआ है, तो वे इसके लिए उत्तराखंड की जनता से क्षमा प्रार्थी हैं।
इसके अलावा, आयोग के पूर्व अध्यक्ष की नियुक्ति पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि चयन उनके पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर किया गया था, और शिकायत मिलने पर उन्होंने ही संबंधित व्यक्ति से इस्तीफा लिया था।
🔴 चंदन सिंह जीना प्रकरण
चंदन सिंह जीना वर्ष 2014 से 2017 तक हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उनके ओएसडी (विशेष कार्याधिकारी) के रूप में कार्यरत रहे हैं। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में हाल ही में ईडी ने जीना के ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें कथित तौर पर 32 लाख रुपये नकद, 12 लग्जरी घड़ियां और लगभग 200 ग्राम सोना बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार जारी है, और इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है।
