उत्तराखंड पासपोर्ट धोखाधड़ी मामले में पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण को न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई अदालत ने किया दोषमुक्त,,,

देहरादून: पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण और नरेश चंद्र द्विवेदी को पासपोर्ट धोखाधड़ी के करीब 15 साल पुराने मामले में देहरादून की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है।
विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई संदीप सिंह भंडारी की अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया। बालकृष्ण पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के लिए कथित कूटरचित दस्तावेज इस्तेमाल करने, जबकि नरेश चंद्र द्विवेदी पर कूटरचना करने का आरोप था। सीबीआई ने बालकृष्ण के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 471 और पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 (1)(बी), जबकि नरेश चंद्र द्विवेदी के खिलाफ आईपीसी की धारा 466 के तहत आरोप लगाए थे। मामला अखिल भारतीय संत समिति के तत्कालीन अध्यक्ष आचार्य प्रमोद कृष्णन की शिकायत से शुरू हुआ था। शिकायत में बालकृष्ण की नागरिकता और पासपोर्ट हासिल करने के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों पर सवाल उठाए गए थे।
सीबीआई के मुताबिक, बालकृष्ण ने वर्ष 1998 में पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। इसके साथ जन्मतिथि व निवास संबंधी प्रमाण के तौर पर सम्पूर्णानंद संस्कृत विवि, वाराणसी से जारी पूर्व मध्यमा और शास्त्री परीक्षा के प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए थे। जांच में सीबीआई ने दावा किया, इन प्रमाण पत्रों पर दर्ज रोल नंबर बालकृष्ण के नाम पर आवंटित नहीं थे। जांच एजेंसी ने नगरपालिका से जारी जन्म प्रमाणपत्रों में भी राष्ट्रीयता को लेकर विसंगतियां मिलने का दावा किया था। सीबीआई ने 19 गवाहों के बयान दर्ज कराए, 38 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। बचाव पक्ष की ओर से भी दो गवाह प्रस्तुत किए। 2014 में अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। बालकृष्ण ने विवि के रिकॉर्ड में गड़बड़ी बताई। नरेश चंद्र द्विवेदी ने भी प्रमाणपत्र में कूटरचना करने से इंकार किया था।
वहीं, अदालत से निकलते हुए आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हमारा न्याय व्यवस्था में पूर्ण विश्वास था और है। एक न्यायिक प्रक्रिया थी जिससे गुजरकर हमें न्याय मिला है।
