उत्तराखंड में जर्जर और बंद स्कूलों के खिलाफ सीजेपी का बड़ा अल्टीमेटम, धामी सरकार को दिया 10 दिन का समय,,,

देहरादून। मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत और बंद पड़े प्राथमिक विद्यालयों के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। पार्टी ने पुष्कर सिंह धामी सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए एक स्पष्ट रोडमैप की मांग की है।
रविवार को देहरादून स्थित प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान सीजेपी के नॉर्थ जोन कोऑर्डिनेटर श्रेष्ठ सिंह खेड़ा और अभिजीत दीपके के नेतृत्व में पार्टी ने राज्य सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की।
🟢 प्रमुख माँगें और मुख्य बिंदु

- 10 दिन का अल्टीमेटम: सीजेपी ने सरकार से मांग की है कि वह बंद पड़े प्राथमिक स्कूलों को दोबारा शुरू करने के लिए अगले 10 दिनों के भीतर एक ठोस कार्ययोजना (रोडमैप) जारी करे।
- 2 अक्टूबर के बाद आंदोलन की चेतावनी: यदि तय समय सीमा के भीतर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो 2 अक्टूबर के बाद प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन का आगाज किया जाएगा।
- शिक्षा मंत्री के बयान का आधार: पार्टी ने विधानसभा में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के उस लिखित जवाब का हवाला दिया, जिसके अनुसार बीते पांच वर्षों में उत्तराखंड में 826 प्राथमिक स्कूल बंद हो चुके हैं।
- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की चेतावनी: मांगें पूरी न होने की स्थिति में सीजेपी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन करने की बात कही है।
- पलायन और ‘भूतिया गांवों’ का मुद्दा: नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों की कमजोर व्यवस्था के कारण निजी शिक्षण संस्थान आगे निकल रहे हैं। साथ ही, पहाड़ से हो रहे पलायन और वीरान पड़े गांवों की स्थिति पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया गया।
सीजेपी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए पिछले आंदोलन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज पर भी गहरा रोष व्यक्त किया है और कहा है कि यदि देवभूमि की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कदम नहीं उठाए गए, तो पार्टी जनता के साथ मिलकर सड़क पर उतरने से पीछे नहीं हटेगी।
