उत्तराखंड ऋषिकेश बाईपास निर्माण, 4,000 पेड़ों के कटान पर वन विभाग ने जताई चिंता, कार्यदायी संस्था को संख्या घटाने के निर्देश,,,

देहरादून। चारधाम यात्रा और सामरिक दृष्टिकोण से बेहद अहम ऋषिकेश-बदरीनाथ मार्ग पर लगने वाले भीषण जाम से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित 13 किलोमीटर लंबे ऋषिकेश बाईपास के निर्माण में अब पर्यावरण और वृक्ष संरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। परियोजना के मौजूदा एलाइनमेंट के कारण लगभग 4,000 पेड़ प्रभावित हो रहे हैं, जिसको लेकर वन विभाग ने कार्यदायी संस्था (राष्ट्रीय राजमार्ग) को पातन के लिए चिह्नित पेड़ों की संख्या घटाने और योजना में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए हैं।
🟢 47 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता, 3,998 पेड़ जद में

ऋषिकेश में संकरी सड़कों और वाहनों के अत्यधिक दबाव के चलते बीते एक दशक से बाईपास निर्माण की मांग उठ रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा तैयार किए जाने वाले इस 13 किमी लंबे बाईपास के लिए लगभग 47 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता है। तय किए गए एलाइनमेंट के अनुसार कुल 3,998 पेड़ प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें से 1,204 पेड़ों का प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांटेशन) करने की योजना बनाई गई है।
🟢 वन विभाग का पुन: आकलन का निर्देश
वन भूमि हस्तांतरण नोडल कार्यालय के अधिकारियों ने परियोजना स्थल का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद कार्यदायी संस्था को पेड़ों की संख्या का पुन: आकलन करने को कहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल वास्तविक आवश्यकता के आधार पर ही न्यूनतम पेड़ों को चिह्नित किया जाए। इसके अलावा, जैव विविधता पार्क के शुरुआती हिस्से में 250 मीटर लंबे भूमिगत भाग के डिजाइन में भी बदलाव के सुझाव दिए गए हैं, ताकि वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित न हो और यातायात भी सुगम बना रहे।
🟢 मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम हेतु 22 करोड़ का प्रावधान
वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंकाओं को कम करने के लिए देहरादून तथा नरेंद्र नगर वन प्रभाग के लिए 22 करोड़ रुपये की धनराशि का प्रावधान किया गया है। कार्यदायी संस्था ने भी वन विभाग के सुझावों के अनुरूप एलाइनमेंट में आवश्यक फेरबदल की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

”इस योजना में वृक्षों को कम से कम नुकसान हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। वृक्षों के ट्रांसप्लांट का काम भी वन महकमे के सहयोग से किया जाएगा।”- डॉ. पंकज कुमार पांडेय, सचिव, लोक निर्माण विभाग
