उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक ऋण घोटाला, अल्मोड़ा शाखा में 2 करोड़ की मंजूरी के बाद 7 करोड़ का लोन जारी, 4 पूर्व अधिकारियों समेत 6 पर FIR,,,

अल्मोड़ा: उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड की खत्याड़ी स्थित अल्मोड़ा शाखा में ऋण स्वीकृति प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है। बैंक प्रबंधन की शिकायत के आधार पर पुलिस ने चार तत्कालीन अधिकारियों और एक निजी कंपनी के दो निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
🔴 इन अधिकारियों और निदेशकों पर दर्ज हुई FIR
अल्मोड़ा शाखा के बैंक प्रबंधक समीर भटनागर द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर जिन लोगों को नामजद किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- तत्कालीन प्रबंध निदेशक दीपक कुमार
- तत्कालीन महाप्रबंधक धर्मवीर सिंह
- सहायक महाप्रबंधक कर्ण सिंह बिष्ट
- तत्कालीन शाखा प्रबंधक मनोज राणा
- निजी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक आनंद सिंह चौहान
- कंपनी की निदेशक सुनीता चौहान
🔴 2 करोड़ की मंजूरी, 7 करोड़ का ऋण जारी करने का आरोप
बैंक की शिकायत के अनुसार, 3 मई 2017 को आयोजित बैंक प्रबंधन समिति की बैठक में एक निजी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की 2 करोड़ रुपये की कैश-क्रेडिट ऋण सीमा के नवीनीकरण को मंजूरी दी गई थी।
आरोप है कि समिति के इस निर्णय के विपरीत जाकर ऋण स्वीकृति पत्र संख्या 304 जारी किया गया, जिसमें स्वीकृत ऋण सीमा को 2 करोड़ रुपये से चुपचाप बढ़ाकर सीधे 7 करोड़ रुपये कर दिया गया।
🔴 जांच में उजागर हुईं गंभीर अनियमितताएं

बैंक प्रबंधन द्वारा कराई गई आंतरिक जांच, विधिक राय (Legal Opinion), लीगल ऑडिट और उच्चस्तरीय जांच रिपोर्ट में कई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक गड़बड़ियां पाई गई हैं। जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- ऋण के एवज में रखी गई इक्विटेबल मॉर्टगेज संपत्ति निर्धारित बैंकिंग मानकों के बिल्कुल अनुकूल नहीं थी।
- कोलेटरल सिक्योरिटी (प्रतिभूति) तय नियमों के विरुद्ध स्वीकार की गई।
- ऋण से जुड़े दस्तावेजों के प्रलेखन (Documentation) में कथित फर्जीवाड़ा और कूटरचना (Forgery) के स्पष्ट संकेत मिले हैं।
🔴 पुलिस ने शुरू की विस्तृत जांच
बैंक द्वारा पत्र संख्या 1691 के माध्यम से संबंधित अधिकारियों एवं कंपनी के निदेशकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। इसके आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।
जांच के दायरे में ऋण स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया, दस्तावेजों की सत्यता, बैंक अधिकारियों की संलिप्तता और संबंधित कंपनी के निदेशकों की भूमिका को शामिल किया गया है।
