उत्तराखंड जनभावनाओं और पर्यावरण का सम्मान, देहरादून-ऋषिकेश हाईवे परियोजना पर पेड़ों का कटान स्थगित, सभी पक्षों से दोबारा होगा संवाद,,,

देहरादून। देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर पर्यावरण प्रेमियों, स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों द्वारा जताई जा रही चिंताओं पर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी हितधारकों के साथ संतोषजनक सहमति और विश्वास का माहौल नहीं बन जाता, तब तक इस परियोजना के अंतर्गत आने वाले पेड़ों का कटान पूरी तरह स्थगित रहेगा।
🟢 वैधानिक स्वीकृतियों के साथ वन्यजीव संरक्षण का प्रावधान
यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसंरचना योजना है। विभाग द्वारा इस पर माननीय उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों और सभी आवश्यक वैधानिक व पर्यावरणीय स्वीकृतियों का पालन करते हुए ही आगे की कार्यवाही की जा रही थी।
परियोजना में विकास के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। इस मार्ग पर अक्सर होने वाली मानव-वन्यजीव संघर्ष और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं:
- हाथी अंडरपास: वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा विशेष हाथी अंडरपास का प्रावधान।
- विशेष कल्वर्ट: छोटे वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष कल्वर्ट (पुलिया) की व्यवस्था।
🟢 संवाद और सहमति से निकलेगा रास्ता
सरकार ने साफ किया है कि प्रदेश का विकास आवश्यक है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी करके कोई भी निर्णय नहीं लिया जाएगा। इसी कड़ी में प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे सभी हितधारकों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं विशेषज्ञों के साथ पुनः एक विस्तृत संवाद स्थापित करें।
”मेरे लिए उत्तराखण्ड की प्रकृति, जनभावनाएँ और प्रदेश का विकास—तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। हमारी सरकार संवाद, सहमति और व्यापक जनहित के आधार पर ही आगे बढ़ेगी। माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों एवं निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हुए ही आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।”
सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि राज्य में विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण और जनता के भरोसे के साथ ही आगे बढ़ाया जाएगा।
