उत्तराखंड दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ 20 मई को देशभर में बंद रहेंगे मेडिकल स्टोर, अस्तित्व बचाव हेतु सड़कों पर उतरेंगे दवा विक्रेता,,,,

हरिद्वार। दवाओं के ऑनलाइन कारोबार (E-Pharmacy) के बढ़ते प्रभाव, कॉर्पोरेट कंपनियों की शोषणकारी नीतियों और जनस्वास्थ्य से हो रहे खिलवाड़ के विरोध में ‘ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स’ ने आगामी 20 मई को देशव्यापी बंद का आह्वान किया है। इस हड़ताल के तहत देश भर के लाखों दवा विक्रेता अपनी दुकानें बंद रखकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराएंगे।
🔴 केमिस्टों को झेलना पड़ रहा है भारी आर्थिक नुकसान: अमित गर्ग

उत्तरांचल औषधि व्यवसायी महासंघ के महामंत्री अमित गर्ग ने रविवार को हरिद्वार प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि ऑनलाइन फार्मेसी की अनियंत्रित कार्यप्रणाली और भेदभावपूर्ण मूल्य निर्धारण नीति के कारण पारंपरिक दवा विक्रेताओं का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
उन्होंने दवा कंपनियों पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा:
”दवा कंपनियां ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को अत्यधिक मार्जिन के साथ दवाएं उपलब्ध करा रही हैं, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले केमिस्टों को बेहद सीमित मार्जिन दिया जा रहा है। बड़े कॉर्पोरेट संस्थान ‘डीप डिस्काउंट’ (भारी छूट) देकर बाजार का संतुलन बिगाड़ रहे हैं, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के छोटे केमिस्टों का धंधा चौपट होने की कगार पर है।”
🔴 जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ और नियमों के उल्लंघन का आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान दवा व्यवसायियों ने ऑनलाइन दवाओं की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए। संगठन का आरोप है कि नियमों में ढील का फायदा उठाकर ऑनलाइन कंपनियां बिना उचित सत्यापन (Verification) के दवाएं बेच रही हैं।
- एक ही पर्चे (Subscription) का बार-बार इस्तेमाल: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर एक ही पर्चे को बार-बार अपलोड कर दवाएं मंगवाई जा रही हैं।
- नशीली और एंटीबायोटिक्स दवाओं का खतरा: बिना कड़े सत्यापन के एंटीबायोटिक्स और नशीली दवाओं की अनियंत्रित बिक्री बढ़ रही है, जो सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है।
🔴 कोविड काल की अस्थायी अधिसूचना को रद्द करने की मांग
महामंत्री अमित गर्ग ने स्पष्ट किया कि कोरोना महामारी के दौरान दवाओं की किल्लत को रोकने के लिए 26 मार्च 2020 को सरकार ने एक अस्थायी अधिसूचना जारी की थी। लेकिन आपदा बीत जाने के बाद भी इसे आज तक जारी रखना बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं है। यह छूट ‘औषधि नियम 65’ के कड़े प्रावधानों को कमजोर कर रही है, जिसका फायदा डिजिटल प्लेटफॉर्म उठा रहे हैं।
🔴 सरकार को चेतावनी: मांगें न मानने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन

महासंघ के पदाधिकारियों (अनिल अरोड़ा, अजय गर्ग, अतुल गर्ग आदि) ने बताया कि इन गंभीर मुद्दों को लेकर पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजा गया था, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
दवा विक्रेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि:
- कोविड काल की अस्थायी अधिसूचना और ई-फार्मेसी से संबंधित नियमों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
- कॉर्पोरेट्स द्वारा दी जा रही अनुचित छूट पर रोक लगाकर बाजार में ‘समान अवसर नीति’ (Level Playing Field) लागू की जाए।
यदि 20 मई तक सरकार ने इन मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो केमिस्ट संघ देशव्यापी बंद के बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।
