उत्तराखंड हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, आरोपियों की सार्वजनिक पिटाई और परेड मामले में सरकार व पुलिस से मांगा जवाब,,,,

नैनीताल: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में पुलिस की निगरानी में एक रेप केस के आरोपियों की सार्वजनिक पिटाई, परेड और उनके फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को नोटिस जारी किया है। अदालत ने चार सप्ताह के भीतर सभी पक्षों से जवाब तलब किया है।
🟢 नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट ने दाखिल की PIL
यह जनहित याचिका ‘नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट’ की ओर से उच्च न्यायालय में दायर की गई है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद राज्य सरकार, प्रमुख सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक (DGP) और पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) को पक्षकार बनाते हुए चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की गई है।
🔴 संविधान के मौलिक अधिकारों का हनन
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रही अधिवक्ता प्रभा नैथानी ने कोर्ट को बताया कि हाल के वर्षों में पुलिस हिरासत में मौजूद आरोपियों की सार्वजनिक पिटाई, परेड निकालने, उन्हें मीडिया के सामने पेश करने और उनके बिना मास्क के फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
याचिका में दावा किया गया है कि पुलिस की इस तरह की कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। यह कानून के शासन और ‘दोषी साबित होने तक व्यक्ति को निर्दोष मानने के सिद्धांत’ के भी विपरीत है।
🔴 28 जुलाई की घटना का विशेष उल्लेख
याचिका में विशेष रूप से 28 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो का हवाला दिया गया है। इसके अनुसार, वीडियो में उत्तराखंड पुलिस के कुछ कर्मी सड़क पर लोगों को लाठी-डंडों से पीटते नजर आए। साथ ही, एक अन्य वीडियो में आरोपियों को सड़क पर घसीटने और जिंदा जलाने जैसी बातें कही गईं, जिससे यह साबित होता है कि न्यायिक प्रक्रिया के स्थान पर सार्वजनिक प्रतिशोध (मॉब जस्टिस) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
🟢 एसओपी (SOP) बनाने की उठी मांग
अदालत को यह भी बताया गया कि घटना के बाद 28 जुलाई 2026 को ही डीजीपी को पत्र भेजकर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने और पूरे राज्य के लिए पुलिस बल के प्रयोग, गिरफ्तार व्यक्तियों के सम्मान, मीडिया संवाद व फोटो-वीडियो जारी करने को लेकर एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाने की मांग की गई थी। लेकिन कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करनी पड़ी।
याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट के ‘इस्लाम खान बनाम राजस्थान राज्य’ मामले के फैसले का हवाला देते हुए उत्तराखंड में भी उसी तर्ज पर सख्त एसओपी लागू करने का अनुरोध किया गया है।
🔴 हाईकोर्ट से प्रमुख की यह मांगें

- गिरफ्तार व्यक्तियों की सार्वजनिक पिटाई, अपमान, मीडिया ट्रायल और आधिकारिक मंचों पर पहचान उजागर करने पर रोक लगे।
- गिरफ्तारी, हिरासत, बल प्रयोग और मीडिया संवाद के संबंध में राज्यव्यापी एसओपी तैयार की जाए।
- पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर पहले से अपलोड आरोपियों के फोटो व वीडियो की समीक्षा कर उन्हें हटाया जाए या उनकी पहचान छिपाई जाए।
