उत्तराखंड हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाला, धामी सरकार का बड़ा एक्शन, पूर्व नगर आयुक्त बर्खास्त, तत्कालीन DM पर मेजर पनिशमेंट की संस्तुति,,,,

हरिद्वार। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक और बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ बेहद कड़े कदम उठाए गए हैं। इस कार्रवाई के तहत तत्कालीन नगर आयुक्त को सेवा से बर्खास्त करने और तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) पर मेजर पनिशमेंट (दीर्घ शास्ति) लगाने की संस्तुति की गई है।
🔴 कड़े प्रशासनिक फैसले और कार्रवाई

मामले की गहन जांच और स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री ने निम्नलिखित दंडात्मक कार्रवाइयों को मंजूरी दी है:
- पूर्व नगर आयुक्त पर गाज: तत्कालीन नगर आयुक्त, हरिद्वार नगर निगम, वरुण चौधरी को गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का दोषी पाते हुए तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है।
- तत्कालीन DM पर मेजर पनिशमेंट: तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार, कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों और कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया है। उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।
- DoPT को भेजी गई फाइल: वरुण चौधरी और कर्मेंद्र सिंह दोनों ही अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को संस्तुति भेज दी गई है।
- एसडीएम पर भी कार्रवाई: घटना के समय कार्यरत तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध ‘परनिंदा प्रविष्टि’ दर्ज करने के साथ ही उनकी तीन वेतनवृद्धियां (Increments) रोकने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
🔴 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया कड़ा रुख अख्तियार

गौरतलब है कि हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद में गड़बड़ी का मामला सामने आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अख्तियार किया था।
“प्रारंभिक निलंबन के बाद हुई गहन जांच”
प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलते ही तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी समेत कई अफसरों को सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया था। इसके बाद मामले की विशेष जांच और ऑडिट कराया गया, जिसमें लापरवाही और पद के दुरुपयोग की पुष्टि हुई।
“भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित हमारे लिए सर्वोपरि हैं। जनता के धन और पद का दुरुपयोग करने वाले दोषियों के खिलाफ ऐसी ही कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।”- पुस्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
🔴 नौकरशाही के लिए स्पष्ट संदेश

धामी सरकार की इस कार्रवाई को उत्तराखंड के प्रशासनिक इतिहास में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और नजीर पेश करने वाली कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। इस फैसले से राज्य की नौकरशाही को स्पष्ट और कड़ा संदेश गया है कि भ्रष्टाचार और जनधन के दुरुपयोग को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
