उत्तराखंड घटगड़ शराब दुकान विवाद में हाईकोर्ट ने सरकार को नीति बनाने के दिए निर्देश, दुकान और स्वामी को मिला सुरक्षा का आश्वासन,,,

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल-कालाढूंगी मार्ग के घटगड़ में खुली मदिरा की दुकान और दुकान स्वामी को सुरक्षा मुहैया कराने से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन के आधार पर दोनों याचिकाओं को निस्तारित कर दिया है. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ में हुई.
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार शराब की दुकानों के उचित संचालन के लिए एक स्पष्ट और बेहतर नीति तैयार करे, जिससे स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े. कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी क्षेत्र में नई दुकान के आवंटन से पूर्व आबकारी विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्थानीय लोगों, महिलाओं और स्कूल जाने वाले बच्चों की भावनाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.
🔴 सरकार का पक्ष और मुख्य सचिव को निर्देश
अदालत में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अवगत कराया गया कि नई आबकारी नीति और 17 जून 2026 के आदेश में दिए गए अन्य निर्देशों के संबंध में मामला उच्च स्तर पर विचाराधीन है. इस पर समुचित निर्णय लेते हुए भविष्य में शराब की दुकान के लिए ऐसी जगह का चयन किया जाएगा, जिससे क्षेत्रवासियों को कोई आपत्ति न हो. सरकार ने यह भी आश्वासन दिया कि स्थानीय निवासियों की भावनाओं का पूरा ख्याल रखा जाएगा ताकि शहर या मुख्य मार्गों पर शिक्षण संस्थानों और आम जनता पर इसका कोई नकारात्मक असर न पड़े. इस संबंध में कोर्ट ने मुख्य सचिव को उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं.
🔴 आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता बलवंत सिंह और सुलक्षणा साह ने अदालत में याचिका दायर कर बताया था कि उन्हें नैनीताल-कालाढूंगी मार्ग के मंगोली क्षेत्र में खुदरा मदिरा बेचने का लाइसेंस सरकार द्वारा प्रदान किया गया था. हालांकि, स्थानीय निवासियों के भारी विरोध के बाद इस दुकान को इसी मार्ग पर आगे घटगड़ क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया.
घटगड़ में भी स्थानीय लोग इस व्यवसाय का लगातार विरोध कर रहे हैं और दुकान के समक्ष धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे लाइसेंस धारकों का व्यापार ठप होने के साथ-साथ किसी अप्रिय घटना के घटित होने की आशंका बनी हुई है. याचिकाकर्ताओं ने सरकार से अपने और अपनी दुकान के लिए पर्याप्त पुलिस सुरक्षा की मांग की थी, उनका तर्क था कि सरकार द्वारा वैध लाइसेंस दिए जाने के कारण उन्हें उचित संरक्षण मिलना चाहिए.
