उत्तराखंड के सूचना विभाग की अनूठी पहल: पीएम की अपील पर देहरादून में शुरू हुआ “ऊर्जा बचाओ अभियान”, शनिवार को मनाया गया ‘नो फ्यूल डे’,,,,

देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन संरक्षण और पेट्रोल-डीजल के सीमित उपयोग को लेकर की गई राष्ट्रव्यापी अपील का व्यापक असर अब उत्तराखंड में भी धरातल पर दिखने लगा है। इसी कड़ी में देहरादून स्थित राज्य सूचना एवं लोक संपर्क विभाग ने ऊर्जा संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय और अनूठी शुरुआत करते हुए कार्यालय में “ऊर्जा बचाओ अभियान” का शंखनाद किया है।

विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से सप्ताह में एक दिन ऐसा निर्धारित किया है, जब कोई भी कर्मचारी अपने निजी पेट्रोल या डीजल वाहन से कार्यालय नहीं आएगा। शनिवार को इस मुहिम का पहला असर साफ तौर पर देखने को मिला। सूचना विभाग के महानिदेशक/निदेशक से लेकर तमाम अधिकारी और कर्मचारी शनिवार को अपने निजी वाहनों को छोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट (सार्वजनिक परिवहन), इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) या फिर साइकिल के जरिए दफ्तर पहुंचे।
🟢 वैश्विक ईंधन संकट और आत्मनिर्भरता की ओर कदम

अभियान की कमान संभाल रहे सूचना विभाग के निदेशक बंशीधर तिवारी ने इस पहल की जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक हालातों और लगातार बढ़ते ईंधन संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लगातार ऊर्जा बचाने की अपील की है। इसी से प्रेरणा लेकर सूचना विभाग ने प्रत्येक शनिवार को “नो फ्यूल डे” (No Fuel Day) के रूप में मनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि देश में ईंधन का उत्पादन सीमित है और वैश्विक उथल-पुथल का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है; ऐसे में देश और राज्य के प्रत्येक नागरिक को इस प्रकार की मुहिमों में बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
🟢 पर्यावरण संरक्षण और हरित क्रांति का बड़ा संदेश

वहीं, विभाग के अपर निदेशक सूचना आशीष त्रिपाठी ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह छोटी सी पहल आने वाले समय में देश की हरित क्रांति और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बेहद सकारात्मक कदम साबित होगी। सरकारी विभागों द्वारा इस तरह के प्रयास शुरू किए जाने से न केवल ऊर्जा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि आम जनता के बीच भी पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण मुक्त भविष्य को लेकर एक बहुत बड़ा और प्रभावी संदेश जाएगा।
सूचना विभाग की इस पहल के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि उत्तराखंड के अन्य शासकीय और प्रशासनिक विभाग भी इस “ऊर्जा बचाओ अभियान” से प्रेरणा लेकर इसे अपने स्तर पर लागू कर सकते हैं।
