बदरीनाथ हाईवे के पास जंगल की आग बुझाते समय दर्दनाक हादसा, झुलसी हालत में मिला शव, परिवार को ₹50 लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग,,,

चमोली। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में धधक रही जंगलों की आग बुझाने के दौरान चमोली जिले से एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप बेड़ूबगढ़ बिरही क्षेत्र में चीड़ के जंगल में लगी भीषण आग को बुझाते समय एक फायर वाचर का संतुलन बिगड़ गया, जिससे वह गहरी खाई में जा गिरा। इस हादसे में फायर वाचर की मौके पर ही मौत हो गई।
मृतक की पहचान राजेंद्र सिंह नेगी (42 वर्ष), पुत्र नंदन सिंह नेगी, निवासी ग्राम पाखी जलगवाड़ (चमोली) के रूप में हुई है।
🔴 15 कर्मियों की टीम के साथ गए थे मौके पर
बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ सर्वेश दुबे से मिली जानकारी के अनुसार, बद्रीनाथ हाईवे के पास बुधवार दोपहर को चीड़ के जंगलों में अचानक भीषण आग भड़क उठी थी। आग तेजी से फैलते हुए पथरीले और चट्टानी इलाके तक पहुंच गई। स्थिति को देखते हुए बदरीनाथ वन प्रभाग की ओर से चमोली रेंज के 15 फायर वाचरों की एक टीम को तुरंत मौके के लिए रवाना किया गया था, जिसमें राजेंद्र सिंह नेगी भी शामिल थे।
शाम करीब 7 बजे तक टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काफी हद तक काबू पा लिया। इसके बाद सभी कर्मचारी वापस बदरीनाथ हाईवे पर लौट आए, लेकिन जब राजेंद्र सिंह वापस नहीं पहुंचे, तो साथियों को चिंता हुई। उन्होंने तुरंत वन विभाग के उच्चाधिकारियों को उनके लापता होने की सूचना दी।
🔴 रातभर चला सर्च ऑपरेशन, सुबह बरामद हुआ शव
लापता फायर वाचर की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक (SP) सुरजीत सिंह पंवार के निर्देश पर एसडीआरएफ (SDRF) और वन विभाग की संयुक्त टीम ने तत्काल सर्च ऑपरेशन शुरू किया। रात 10:30 बजे: रेस्क्यू टीम को जंगल के बीच राजेंद्र सिंह का मोबाइल फोन बरामद हुआ, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। अत्यधिक अंधेरा और दुर्गम पहाड़ी रास्ता होने के कारण रात में अभियान रोकना पड़ा।
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- गुरुवार सुबह: दोबारा खोजबीन शुरू की गई, जिसके बाद राजेंद्र सिंह का शव करीब 70 मीटर गहरी खाई से बरामद हुआ।
🔴 शव झुलसी अवस्था में मिला
वन विभाग के मुताबिक, चट्टान से गिरने के कारण राजेंद्र सिंह का शव आग से झुलसी हुई अवस्था में मिला है। आशंका जताई जा रही है कि आग बुझाते समय पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने के कारण वह सीधे गहरी खाई में जा गिरे।
🔴 क्षेत्र में शोक की लहर, परिजनों ने की ₹50 लाख मुआवजे की मांग
इस दर्दनाक हादसे की खबर मिलते ही मृतक के परिजनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में कोहराम मच गया। घटना से आक्रोशित और दुखी स्थानीय लोगों व जनप्रतिनिधियों ने सरकार और प्रशासन से पीड़ित परिवार के लिए निम्नलिखित मांगें उठाई हैं:
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- मृतक के आश्रितों को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
- परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि अपनी जान जोखिम में डालकर वनों की रक्षा करने वाले फायर वाचरों के लिए सरकार को एक ठोस और विशेष सुरक्षा व सहायता नीति बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दिन न देखना पड़े।
