उत्तराखंड देवभूमि का हुनर, रेशम कोकून से बनाई केदारनाथ और नंदा-सुनंदा की जीवंत आकृतियां, ब्रिक्स सम्मेलन तक गूंजी नैनीताल की महिलाओं की गूंज,,,

नैनीताल: देवभूमि उत्तराखंड की माटी और यहां की महिलाओं के हुनर का डंका अब न केवल देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी बज रहा है। रेशम विभाग की एक पांच दिवसीय मामूली ट्रेनिंग से शुरू हुआ सफर आज एक मिसाल बन चुका है। नैनीताल जिले की महिला उद्यमियों ने रेशम के कोकून का इस्तेमाल करके ऐसी अद्भुत पेंटिंग्स, फोटो फ्रेम और क्राफ्ट उत्पाद तैयार किए हैं, जो इससे पहले कभी नहीं देखे गए थे।
उत्तराखंड के नैनीताल की किरण जोशी रेशम के कोकून में रंग भरकर सुंदर कलाकृति बना रही हैं जो कि हर किसी को यह बोलने के लिए मजबूर कर देगा कि ये क्या जादू है। यह काम वह स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ मिलकर कर रही है। एक तरफ वे अपनी कला से सबको मंत्रमुग्ध कर रही हैं तो वहीं दूसरी ओर इससे उनको अच्छी आमदनी हो रही है। उनके इस काम से अन्य महिलाएं भी प्रेरणा ले रही हैं और अपनी कला की छाप छोड़ रही हैं।
🟢 रेशम कोकून से उकेरा जादू
कीमती रेशम कोकून से प्राप्त होता है। इसी कोकून को अपनी कला को पिरोने का काम किरण जोशी कर रही हैं। अपनी इस यात्रा के बारे में उन्होंने बताया कि हमने कोकून से फ्लावर बुके, राखियां और बैग्स बनाने की ट्रेनिंग ली है। ये प्रोडक्ट पहले से ही दक्षिण भारत में बन रहे हैं लेकिन कोकून से पेंटिंग बनाने का काम हमने शुरू किया। उन्होंने बताया कि इस काम वह अकेली नहीं करती हैं बल्कि 10 से 15 महिलाएं साथ में काम करती हैं। हम इस काम को करने के लिए स्वयं सहायता समूह से जुड़े हैं। हमारे समूह का नाम रेशम नई पहल है।
🟢 लोगो ने किया प्रोडक्ट पसंद
किरण जोशी ने नैनीताल के हल्द्वानी के रेशम विभाग से कोकून के फूल बनाने की पांच दिनों की ट्रेनिंग ली। इस दौरान उनके साथ 25 महिलाओं ने ट्रेनिंग प्राप्त की। इसी दौरान रेशम विभाग के कुमाऊं मंडल के डिप्टी डायरेक्टर हेमचंद्र ने किरण जोशी को कोकून से और भी अच्छे प्रोडक्ट बनाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय देवी देवताओं की तस्वीरों को कोकून से पिरोना शुरू किया जिसको लोगों ने काफी पसंद किया।

‘कालिका स्वयं सहायता समूह’ और ‘रेशम नई पहल’ से जुड़ी इन महिलाओं ने अपनी लगन से न केवल अपना जीवन बदला है, बल्कि उत्तराखंड की लोक-कला और धार्मिक धरोहरों को एक नया कैनवास दिया है।
🟢 कोकून पेंटिंग
नवाचार जिसने राष्ट्रीय स्तर पर खींचा ध्यान
सामान्य तौर पर रेशम के कोकून से फूल, बुके, राखियां, बैज या मालाएं ही बनाई जाती थीं। लेकिन नैनीताल की किरण जोशी इसमें नवाचार करते हुए ‘कोकून पेंटिंग’ की शुरुआत की।
🟢 पौराणिक स्थलों को दिया आकार
उन्होंने कोकून को काटकर, रंगकर और तराशकर नंदा-सुनंदा देवी, बाबा केदारनाथ, बद्रीनाथ धाम, जागेश्वर धाम और धारी देवी जैसे पवित्र स्थलों के भव्य फोटो फ्रेम बनाए।
🟢 वीआईपी पोर्ट्रेट्स
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कई दिग्गज हस्तियों के कोकून से बने जीवंत पोर्ट्रेट तैयार किए जा चुके हैं, जिन्हें गोचर मेले से लेकर हरिद्वार और देहरादून के विशेष कार्यक्रमों में सराहा गया।
🟢 कड़ी मेहनत और हुनर
एक कोकून पेंटिंग को तैयार करने में लगभग 4 दिन का समय लगता है। इसमें कोकून की सफाई, कीड़ा निकालना, कटिंग, कलरिंग, ड्राइंग और पेस्टिंग जैसी बारीकियां शामिल हैं।
₹8 लाख से सफर शुरू, अब ₹25 लाख से अधिक का टर्नओवर
रेशम विभाग (कुमाऊं मंडल) द्वारा मिली ट्रेनिंग के बाद महिलाओं ने जब अपना काम प्रदर्शित किया, तो उन्हें पहला बड़ा ऑर्डर डॉक्टर पुनीत अग्रवाल से ₹2.85 लाख का मिला। इसके बाद रामलीला पात्रों व केदारनाथ धाम की आकृतियों के लिए ₹51,000 का ऑर्डर मिला।

🟢 वार्षिक टर्नओवर
‘कालिका स्वयं सहायता समूह’ का टर्नओवर ₹17 से ₹18 लाख और ‘रेशम नई पहल’ का टर्नओवर ₹8 से ₹10 लाख तक पहुंच गया है।
🟢 विभिन्न उत्पाद
कोकून उत्पादों के अलावा यह समूह पहाड़ी दालें, बड़ी-मंगौड़ी, पिछौड़ा, और जीआई टैग प्राप्त ‘ऐपण कला’ (Aepan Art) से सजी साड़ियां, दुपट्टे और स्टॉल भी तैयार करता है।kala4
ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS) में बजा डंका, सीएम धामी ने भी सराहा
इस अनूठे नवाचार के लिए किरण जोशी को 25 मार्च 2025 को राज्य स्तरीय नवाचार पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
🟢 BRICS महिला सम्मेलन (कोच्चि)
जुलाई 2026 में केरल के कोच्चि में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) महिला सम्मेलन में उत्तराखंड राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए किरण जोशी शामिल हुईं, जहां दिल्ली सरस गैलरी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने इन प्रोडक्ट को सराहा।

🟢 मुख्यमंत्री आवास में मुलाकात
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रशासनिक अधिकारियों ने समूह के उत्पादों की सराहना की है। उत्तराखंड विधानसभा भवन में धारी देवी की कोकून पेंटिंग स्थापित करने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
🟢 सरकारी योजनाओं और बैंकिग तंत्र ने दी नई ताकत
किरण जोशी ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार की योजनाएं ग्रामीण महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही हैं। हमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत समूह बनने पर ₹20,000 का रिवॉल्विंग फंड और 7% ब्याज दर पर ₹6 लाख तक की कैश क्रेडिट लिमिट (CCL) बिना किसी गारंटी के उपलब्ध हो रही है। दीनदयाल उपाध्याय योजना के तहत बिना ब्याज के ₹5 लाख का व्यावसायिक लोन मिलने से महिलाओं को साहूकारों या बिचौलियों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं।
रोजगार और स्वावलंबन: गांव की महिलाएं सुबह-शाम मवेशियों का काम निपटाकर दिन में समूह में काम करती हैं, जिससे उनके परिवारों को आर्थिक संबल मिला है और बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने में मदद मिल रही है।
सरकार के द्वार मिल रहे प्रोत्साहन पर किरण जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन हमें मार्केटिंग में काफी सपोर्ट करता है। इसके तहत हमें काफी महंगे स्टॉल मुफ्त में उपलब्ध कराए जाते हैं। स्थानीय बाजार में भी हमारे प्रोडक्ट को बिकने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि देहरादून को-ऑपरेटिव का भी हमें सहयोग मिला। उन्होंने अपने आउटलेट के लिए हमसे प्रोडक्ट बनवाए। ये हमारे प्रोडक्ट को अपने आउटलेट पर बिना किसी कमीशन के बेचते हैं।
