उत्तराखंड पंच केदारों में प्रतिष्ठित तृतीय केदार श्री तुंगनाथ जी के कपाट खुले, श्रद्धालुओं का हुआ भव्य स्वागत,,,,
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड की पावन देवभूमि में आज पंच केदारों में से एक, विश्व के सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित तृतीय केदार श्री तुंगनाथ महादेव के कपाट श्रद्धालुओं के लिए पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ खोल दिए गए हैं। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही इस वर्ष की पंच केदार यात्रा का एक और महत्वपूर्ण अध्याय शुरू हो गया है।
वैदिक परंपराओं के साथ हुआ उद्घाटन
आज सुबह शुभ मुहूर्त पर मंदिर के मुख्य द्वार भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलने के अवसर पर मंदिर परिसर भगवान शिव के जयकारों से गुंजायमान रहा। भारी संख्या में उपस्थित तीर्थयात्रियों ने बाबा तुंगनाथ के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
पौराणिक कथा एवं महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के पश्चात जब पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव को ढूंढ रहे थे, तब महादेव ने बैल का रूप धारण किया था। जब पांडवों ने उन्हें पहचान लिया, तो महादेव पृथ्वी में समाने लगे। उस समय उनके शरीर के विभिन्न भाग पांच अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए, जिन्हें ‘पंच केदार’ कहा जाता है:
- केदारनाथ: महादेव का पृष्ठ भाग (पीठ)।
- मदमहेश्वर: महादेव की नाभि।
- तुंगनाथ: महादेव की भुजाएं।
- रुद्रनाथ: महादेव का मुख।
- कल्पेश्वर: महादेव की जटाएं।
तुंगनाथ मंदिर के बारे में एक विशेष तथ्य यह भी है कि यह विश्व का सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर है, जो लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ दर्शन करने के बाद भक्त प्रायः चंद्रशिला चोटी की ओर भी जाते हैं।
श्रद्धालुओं का हार्दिक अभिनंदन
चारधाम और पंच केदार यात्रा पर आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं का उत्तराखंड में भव्य स्वागत किया गया है। प्रशासन और स्थानीय समुदायों द्वारा यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।
सुखद और सुरक्षित यात्रा की कामना
इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं प्रेषित की गई हैं। देवाधिदेव महादेव से प्रार्थना की गई है कि:
”सभी भक्तों की यह आध्यात्मिक यात्रा सुखद, सुरक्षित और कल्याणकारी हो और बाबा तुंगनाथ का आशीर्वाद प्रत्येक श्रद्धालु पर बना रहे।”
आध्यात्मिक महत्व
तुंगनाथ मंदिर पंच केदारों में तृतीय स्थान पर आता है और अपनी अद्वितीय वास्तुशिल्प व प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। कपाट खुलने के साथ ही अब आगामी शीतकाल तक भक्त यहाँ भगवान शिव के दर्शन कर सकेंगे।

