उत्तराखंड के सभी 15,906 गांवों में सोलर लाइटों का खुलेगा कच्चा चिट्ठा, पंचायती राज निदेशालय ने मांगा कार्य का पूरा ब्योरा,,,

देहरादून: विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड के पर्वतीय और ग्रामीण अंचलों को सोलर लाइट से जगमगाने के सरकारी दावों की अब वास्तविक जमीनी हकीकत सामने आएगी। राज्य की सभी 7,813 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 15,906 गांवों में विभिन्न विभागों द्वारा अब तक लगाई गई सोलर लाइटों का पूरा हिसाब-किताब जुटाने की कवायद शुरू हो गई है।
पंचायती राज निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिलों के जिला पंचायती राज अधिकारियों (DPRO) को पत्र जारी कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
🔴 इन मुख्य बिंदुओं पर जुटाया जा रहा है डेटा
- वास्तविक स्थिति: कितने गांवों में सोलर लाइटें पूरी तरह चालू हैं और कितनी खराब पड़ी हैं?
- वंचित क्षेत्र: ऐसे कौन से गांव या तोक हैं, जिन्हें अभी तक इस योजना का लाभ नहीं मिल सका है?
- अन्य परिसंपत्तियां: गांवों में स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र (Solar Power Plants), नदी-नालों की वर्तमान स्थिति और ठोस कचरा प्रबंधन (Waste Management) का पूरा विवरण।
🔴 सुरक्षा और वन्यजीवों के खतरे को कम करना था उद्देश्य
उत्तराखंड में ग्राम्य विकास विभाग, पंचायती राज, और वन विभाग समेत कई एजेंसियां अलग-अलग योजनाओं के तहत वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर लाइटें लगा रही हैं। इस मुहिम का एक बड़ा उद्देश्य ग्रामीण अंचलों को रोशन करने के साथ-साथ वन क्षेत्रों से सटे गांवों में जंगली जानवरों (जैसे गुलदार, भालू) की आवाजाही से होने वाले खतरे को कम करना और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
🔴 आंकड़ों का अभाव बना चुनौती
सालों से चल रही इस मुहिम के बावजूद, शासन के पास अब तक ऐसा कोई एकीकृत या स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं था, जिससे यह पता चल सके कि वास्तव में धरातल पर कितनी लाइटें चालू हालत में हैं और कितने ग्रामीण परिवारों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।
🔴 तैयार होगा ग्राम पंचायतों का अपडेटेड डेटाबेस
पंचायती राज निदेशक निधि यादव के अनुसार, इस विशेष कवायद का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहां या तो सोलर लाइटें पर्याप्त नहीं हैं या फिर रखरखाव के अभाव में बंद पड़ी हैं।
इन आंकड़ों के एकत्र होने के बाद:
- आगामी विकास योजनाओं के लिए प्राथमिकताएं तय करना आसान होगा।
- वास्तव में जरूरतमंद और दूरस्थ गांवों तक बजट और सुविधाएं पहुंचाई जा सकेंगी।
- ग्राम पंचायतों का एक मजबूत और अपडेटेड डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा, जिससे कचरा प्रबंधन और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
