उत्तराखंड में MBBS डॉक्टरों के लिए नया नियम लागू अब 3 साल सरकारी सेवाएँ करने के बाद ही मिलेगी PG की अनुमति,,,,

देहरादून। उत्तराखंड के राजकीय मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों के लिए स्वास्थ्य विभाग एक नई नीति लागू करने जा रहा है। अब एमबीबीएस पास-आउट डॉक्टरों को पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) में प्रवेश या आवेदन के लिए कम से कम 3 साल तक प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं देनी होंगी। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है, जिसे आगामी कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
🟢 पर्वतीय क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करने की पहल
राज्य में लंबे समय से डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है, जिससे खासकर पर्वतीय इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं। विभाग के अनुसार, वर्तमान में एमबीबीएस पूरा करने के बाद बॉन्ड के तहत डॉक्टर पर्वतीय क्षेत्रों में तैनाती तो ले लेते हैं, लेकिन कुछ ही समय बाद वे पीजी के लिए आवेदन कर देते हैं।
पीजी में चयन होने पर डॉक्टरों को पढ़ाई के दौरान आधा वेतन भी मिलता रहता है और वे कागजों में पदस्थ रहते हैं, लेकिन भौतिक रूप से अस्पतालों में उपलब्ध नहीं होते। इससे स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की कमी बनी रहती है।
🟢 नीति के प्रमुख बिंदु
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- 3 साल की अनिवार्य प्रैक्टिस: एमबीबीएस के बाद स्वास्थ्य विभाग में सेवा देने वाले डॉक्टरों को अनिवार्य रूप से 3 साल प्रैक्टिस करनी होगी।
- पीजी के लिए अर्हता: 3 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद ही पीजी आवेदन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) दिया जाएगा।
- स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: इस कदम से ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निरंतर डॉक्टर मिल सकेंगे।
🟢 स्वास्थ्य विभाग का रुख
“स्वास्थ्य विभाग ने एक नई पॉलिसी तैयार की है, जिसे कैबिनेट के सम्मुख रखा जाएगा। राजकीय मेडिकल कॉलेजों से निकलने वाले डॉक्टर जॉइनिंग के कुछ ही समय बाद पीजी के लिए चले जाते हैं, जिससे एमबीबीएस डॉक्टरों की कमी हो जाती है। नई नीति के तहत स्वास्थ्य विभाग में जॉइन करने वाले डॉक्टरों को कम से कम 3 साल सेवा देना अनिवार्य होगा, उसके बाद ही उन्हें पीजी की अनुमति दी जाएगी।”- डॉ. सुनिता टम्टा, स्वास्थ्य महानिदेशक, उत्तराखंड
कैबिनेट से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही यह व्यवस्था राज्य के सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत प्रभावी कर दी जाएगी, जिससे प्रदेश की जनता को बेहतर और निरंतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
