उत्तराखंड सरकारी स्कूलों की बदहाली पर नैनीताल हाईकोर्ट सख्त, 2500 प्राथमिक विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे, 270 में पानी तक नहीं,,,

नैनीताल। उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों की दयनीय स्थिति और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर दायर जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के प्रति सख्त रुख अपनाया है. मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा अदालत में पेश किए गए पुराने आंकड़ों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की.
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार की ओर से शपथ पत्र में दाखिल किए गए आंकड़े वर्ष 2024 के हैं. अदालत ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया है कि वह जल्द से जल्द वर्तमान स्थिति की अद्यतन (Updated) रिपोर्ट और आंकड़े अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे.
🔴 2500 प्राथमिक विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे, 270 में पानी तक नहीं
सुनवाई के दौरान प्रदेश के सरकारी स्कूलों की बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई:
- शिक्षकों का संकट: राज्य के करीब 2,500 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जिनका संचालन केवल एक शिक्षक के भरोसे हो रहा है.
- पानी का अभाव: प्रदेश के 270 स्कूलों में बच्चों के लिए पीने के पानी (पेयजल) तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है.
- खतरे में नौनिहाल: याचिकाकर्ता को आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के अनुसार, करीब 250 स्कूल भवन अत्यंत जर्जर स्थिति में हैं जो कभी भी हादसों का सबब बन सकते हैं. बजट जारी न होने से इनका जीर्णोद्धार रुका हुआ है, जिससे मासूम बच्चों की जान पर लगातार खतरा बना हुआ है.
🔴 क्या है पूरा मामला?
यह मामला मूल रूप से पिथौरागढ़ निवासी डॉ. राजेश पांडे द्वारा वर्ष 2024 में दायर एक जनहित याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें पिथौरागढ़ सहित पूरे प्रदेश के स्कूलों में अध्यापकों की भारी कमी और खस्ताहाल भवनों का मुद्दा उठाया गया था. पूर्व में हाईकोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार से यह भी सवाल किया था कि यदि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षकों की भौतिक नियुक्ति संभव नहीं है, तो ऑनलाइन शिक्षा का लाभ बच्चों तक कैसे पहुंचाया जाएगा.
मामला लंबे समय से लंबित रहने और सरकार की ओर से ठोस कदम न उठाए जाने पर देहरादून निवासी रवींद्र सिंह मेहरा ने नई याचिका दायर कर इसे दोबारा अदालत के समक्ष उठाया. याचिका में गुहार लगाई गई है कि विद्यालयों में तुरंत शिक्षकों की नियुक्ति की जाए और जर्जर भवनों की मरम्मत कराकर नौनिहालों का भविष्य व जीवन सुरक्षित किया जाए.
