उत्तराखंड हरिद्वार सहकारिता चुनाव में पूर्व चेयरमैन विकास तिवारी की दबंगई और अमर्यादित टिप्पणी पर भड़के लोग, तिवारी को सरेआम दौड़ा-दौड़ा कर पीटा,,,,

हरिद्वार। तीर्थनगरी हरिद्वार में ‘थोक केन्द्रीय उपभोक्ता सहकारी भण्डार लिमिटेड’ के डायरेक्टर पद के चुनाव के दौरान उस समय भारी हंगामा और अफरा-तफरी मच गई, जब मतदान केंद्र पर पूर्व चेयरमैन और भाजपा नेता विकास तिवारी की दबंगई से आक्रोशित लोगों ने उनकी जमकर धुनाई कर दी। आरोप है कि विकास तिवारी न सिर्फ मतदान प्रक्रिया में बार-बार अवैध रूप से हस्तक्षेप कर रहे थे, बल्कि उन्होंने वहां मौजूद एक विशेष समाज पर आपत्तिजनक टिप्पणी भी की, जिससे माहौल पूरी तरह बेकाबू हो गया। इस हाई-प्रोफाइल मारपीट के बाद क्षेत्र में राजनीतिक गरमाहट बढ़ गई है।
🔴 मतदान केंद्र पर दबंगई और गुर्जर समाज पर टिप्पणी बनी विवाद की वजह

प्रत्यक्षदर्शियों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल के सामने स्थित भण्डार के कार्यालय में डायरेक्टर पद के लिए मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से चल रही था। इसी दौरान पूर्व चेयरमैन विकास तिवारी वहां पहुंचे और मतदाताओं को बार-बार टोकने व चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास करने लगे।
विकास तिवारी के अत्यधिक हस्तक्षेप को देखते हुए चुनाव मैदान में उतरे अन्य प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने उन्हें वहां से हटने को कहा। परंतु, पूर्व चेयरमैन होने के रसूख के कारण वह लगातार अपनी दबंगई दिखाते रहे। विवाद तब और गहरा गया जब विकास तिवारी ने वहां मौजूद गुर्जर समाज के लोगों पर अभद्र और अमर्यादित टिप्पणी कर दी। यह बात गुर्जर समाज के युवाओं और समर्थकों को बर्दाश्त नहीं हुई और उन्होंने विकास तिवारी को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया।
🔴 बचाने आगे नहीं आया कोई, हमलावरों में से एक पुलिस की गिरफ्त में
चश्मदीदों के मुताबिक, गुस्साए लोगों ने भाजपा नेता को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, लेकिन इस दौरान उनकी बदतमीजी से नाराज किसी भी व्यक्ति या समर्थक ने उन्हें बचाने का प्रयास नहीं किया। मारपीट के बाद हमलावर मौके से भागने लगे, जिनमें से एक आरोपी को मौके पर मुस्तैद पुलिस कर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए दबोच लिया। घटना के बाद सहम चुके विकास तिवारी ने अपनी जान का खतरा बताते हुए नगर कोतवाली में जान से मारने के प्रयास की तहरीर दी है, जिसके आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
🔴 विवादों से पुराना नाता, पहले भी पार्टी को पहुंचा चुके हैं भारी नुकसान
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी सूत्रों की मानें तो विकास तिवारी का विवादों और बदतमीजी से पुराना नाता रहा है।
- 2018 का चुनाव: इससे पहले साल 2018 के निकाय चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी अनु कक्कड़ के पक्ष में प्रचार के दौरान विकास तिवारी ने कई पोलिंग बूथों पर जाकर मतदाताओं और स्थानीय लोगों के साथ घोर बदतमीजी की थी।
- पार्टी को नुकसान: उनकी इस बदतमीजी से नाराज होकर तत्कालीन मतदाताओं ने विरोध स्वरूप विपक्ष के पक्ष में मतदान कर दिया था, जिसके चलते भाजपा के कई अधिकृत पार्षदों को करारी हार का सामना करना पड़ा था।
🔴 सहकारी भंडार में 2 करोड़ की घूस और लापरवाही का बड़ा खुलासा
इस चुनावी बवाल के बीच ‘थोक केन्द्रीय उपभोक्ता सहकारी भण्डार’ से जुड़ा एक और बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला भी सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, भण्डार से जुड़े एक बड़े मुकदमे को जानबूझकर हारने के लिए 2 करोड़ रुपये के लेनदेन (घूस) की बात सामने आ रही है।
हैरानी की बात यह है कि विभागीय उच्च अधिकारियों ने इस महत्वपूर्ण मुकदमे में कोर्ट के भीतर कोई पैरवी तक नहीं की। इतना ही नहीं, विभाग के इस कथित ढुलमुल रवैये के कारण 50 साल पुराने मुख्य कार्यालय को छोड़कर सारा सामान उठाकर एक किराए की दुकान में शिफ्ट करना पड़ा। विभागीय अधिकारियों की संदेहास्पद भूमिका इस बात से भी साफ होती है कि इस बड़े फैसले के खिलाफ वे ऊपरी अदालत में अपील करने तक नहीं गए, जो सीधे तौर पर एक बड़े भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
फिलहाल, पुलिस चुनाव में हुई मारपीट और तहरीर के आधार पर कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर सहकारी भंडार के भीतर चल रहे करोड़ों के इस घोटाले ने सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

