उत्तराखंड केदारनाथ में तीर्थ पुरोहितों का भारी आक्रोश, BKTC अध्यक्ष के खिलाफ की नारेबाजी, तीर्थ पुरोहितों ने की धाममें’VIP कल्चर’ खत्म करने की उग्र मांग,,,,
रुद्रप्रयाग/केदारनाथ। विश्वप्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ के आंगन में तीर्थ पुरोहितों और बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) के बीच तनाव गहरा गया है। मंदिर की व्यवस्थाओं और बढ़ते ‘वीआईपी कल्चर’ को लेकर तीर्थ पुरोहितों ने मुखर होते हुए BKTC अध्यक्ष अजेंद्र अजय (हेमंत द्विवेदी के संदर्भ में आक्रोश) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया।
विरोध का मुख्य कारण: आम श्रद्धालु बनाम खास व्यवस्था
तीर्थ पुरोहितों का आरोप है कि मंदिर प्रशासन द्वारा वीआईपी दर्शनों को अत्यधिक प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके कारण घंटों से लाइनों में लगे आम श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पुरोहित समाज का कहना है कि केदारनाथ धाम की गरिमा और परंपराओं के विपरीत व्यवस्थाएं थोपी जा रही हैं।
पुरोहितों की प्रमुख माँगें:

- वीआईपी कल्चर पर तत्काल रोक: मंदिर के भीतर विशिष्ट व्यक्तियों के लिए अलग से की जा रही विशेष व्यवस्थाओं को तुरंत बंद किया जाए।
- समान दर्शन व्यवस्था: हर श्रद्धालु को समान रूप से दर्शन करने का अधिकार मिले और मंदिर की मर्यादा बनी रहे।
- प्रबंधन में सुधार: मंदिर समिति के कामकाज और स्थानीय तीर्थ पुरोहितों की उपेक्षा पर नाराजगी जताते हुए प्रबंधन शैली में बदलाव की मांग की गई।
नारेबाजी से गूंजा केदारनाथ परिसर
प्रदर्शन के दौरान तीर्थ पुरोहितों ने ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया और मंदिर की मौलिक परंपराओं के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।
शासन-प्रशासन की चुनौती
यात्रा सीजन के चरम पर होने के कारण इस विरोध प्रदर्शन ने शासन और प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारू दर्शन व्यवस्था को बनाए रखना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
अब देखना यह होगा कि मंदिर समिति और सरकार इस गतिरोध को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती है और क्या केदारनाथ धाम में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था में कोई बड़े बदलाव किए जाते हैं।


