हरिद्वार मनसा देवी – चंडी देवी रोपवे किराया वृद्धि और ‘करोड़ों के बंटवारे’ पर हरिद्वार नगर निगम में हुआ भूचाल, निशाने पर मेयर पति और पार्षद, उच्चस्तरीय जांच की मांग,,,

हरिद्वार: मनसा देवी मंदिर का रोपवे संचालन कर रही ऊषा ब्रेको कंपनी द्वारा बिना बोर्ड अनुमति के किराया बढ़ाए जाने और इसके बदले में कथित तौर पर बांटी गई करोड़ों की रकम को लेकर हरिद्वार नगर निगम में घमासान मच गया है। इस पूरे मामले में पार्षदों के निशाने पर एक वरिष्ठ पार्षद के साथ-साथ मेयर पति भी आ गए हैं। अपनी हो रही किरकिरी और छवि खराब होने से खफा पार्षदों ने एकजुट होकर मेयर को ज्ञापन सौंपा है और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
🔴 बिना बोर्ड बैठक चुपचाप बढ़ा दिया किराया

सूत्रों के अनुसार, मनसा देवी मंदिर का रोपवे चला रही कंपनी ने चुपचाप किराए में 21 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। इसके तहत पूर्व निर्धारित 199 रुपये के किराए को बढ़ाकर सीधे 220 रुपये कर दिया गया है। नियमानुसार किराए में इस तरह की कोई भी वृद्धि नगर निगम की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाकर और चर्चा के बाद ही की जानी चाहिए थी, लेकिन कंपनी ने नियमों को ताक पर रखकर इसे लागू कर दिया। आरोप है कि कंपनी ने मेयर के साथ मिलकर ‘सेटिंग’ की और पार्षदों को मैनेज करने के नाम पर भारी-भरकम धनराशि भेंट की।
🔴 पार्षदों की ‘कीमत’ तय कर घर-घर पहुँचाई गई रकम
इस कथित सौदेबाजी के बाद मिली करोड़ों की धनराशि के बंटवारे की जिम्मेदारी मध्य हरिद्वार के एक चार बार के निर्वाचित पार्षद को सौंपी गई। आरोप है कि इस पार्षद ने अपने ही बोर्ड के साथियों की अलग-अलग ‘कीमत’ तय कर दी और घर-घर जाकर लिफाफे बांटने शुरू कर दिए।
मामला तब खुला जब अलग-अलग पार्षदों को अलग-अलग रकम (जैसे किसी को 1.50 लाख, तो किसी को 70 हजार, 50 हजार, 45 हजार, 35 हजार, 30 हजार और 25 हजार रुपये) मिलने की बात सामने आई। इस असमान बंटवारे और घर-घर जाकर पैसे पहुँचाने के तौर-तरीकों ने पूरी पोल खोलकर रख दी। चर्चा यह भी है कि इस पार्षद का नाम पहले भी एक किटी पार्टी में धन गबन के मामलों में सुर्खियों में रहा है।
🔴 मेयर के पति की भूमिका पर टिकी निगाहें
पार्षदों के बीच इस बात की सुगबुगाहट तेज है कि आखिर इस डील के तहत मेयर पति की संलिप्तता कितने में तय हुई थी, जिसका खुलासा होना अभी बाकी है। इस पूरी घटना से पार्षदों की सार्वजनिक छवि पर गहरा असर पड़ा है, जिसके चलते मात्र 15 पार्षदों ने मोर्चा खोलते हुए इस वित्तीय अनियमितता और बिना बोर्ड अनुमति के किराया वृद्धि के मामले में निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
